हेपेटाइटिस बी और सी कर रहा हमला
बिजनौर। जिले के लोगों पर हेपेटाइटिस बी और सी हमला कर रहा है। 2019 में हेपेटाइटिस बी के 72 और सी के 84 मरीज मिल चुके हैं। जबकि पांच सिफलिस (यौन रोग) और चार एचआईवी पॉजिटिव निकले हैं। जिला रक्त कोष की जांच में यह खुलासा हुआ है। चिकित्सकों की सलाह है कि इनमें से किसी भी बीमारी से पीड़ित व्यक्ति को रक्तदान नहीं करना चाहिए। क्योंकि उनका दिया खून किसी के काम नहीं आता।
हेपेटाइटिस बीमारी ज्यादातर वायरस के कारण होती है, लेकिन कभी कभी यह बैक्टीरिया के संक्रमण से भी हो सकती है। चिकित्सकों के अनुसार वायरस से होने वाली हेपेटाइटिस कभी कभी गंभीर रूप धारण कर लेती है। इसलिए इसमें विशेष सावधानी बरतने की आवश्यकता होती है। शराब और अन्य धूम्रपान करने के कारण हेपेटाइटिस बी की बीमारी पैदा होती है। साथ ही संक्रमित सुइयों से खून चढ़ाने अथवा शरीर पर टैटू गुदवाने आदि से भी हो जाती है। त्वचा और आंखों का पीलापन (पीलिया), पेशाब पीला आना, अत्यधिक थकान, उल्टी और पेट दर्द इसके प्रमुख लक्षण है। इससे बचने के लिए टीकाकरण कराना बेहद जरूरी है।
जिला रक्त कोष प्रभारी डॉक्टर संजय कुमार शंकर बताते हैं कि हेपेटाइटिस सी की समस्या असुरक्षित यौन संबंध बनाने और आवश्यकता से अधिक सौंदर्य प्रसाधनों का प्रयोग करने से इसके बढ़ने के चांस अधिक रहते हैं। कभी कभी प्रसव के दौरान संक्रमित माता से बच्चे में हो सकता है। हेपेटाइटिस सी और एचआईवी के लक्षण लगभग एक जैसे होते हैं। इसके लक्षण 15 दिन से लेकर पांच माह तक बने रहते हैं। कभी कभी कुछ लोगों में कोई संक्रमण नहीं दिखाई देता, जबकि ये संक्रमण फैलाने में अहम भूमिका निभाते हैं। इन सबसे दूरी बनाने की जरूरत है। ब्लड बैंक के आंकड़ों के अनुसार साल 2019 में हेपेटाइटिस बी के 72, हेपटाइटिस सी के 84, एचआईवी के चार, सिफलिस (यौन रोग) के पांच मरीज सामने आए।