बिजनौर में कांवड़ बनाता दाऊद का परिवार।
- फोटो : amar ujala
गंगा जमुनी तहजीब को बनाए रखने की इससे अच्छी मिसाल नहीं हो सकती। बिजनौर में एक मुस्लिम परिवार धर्म की दीवारों को गिराकर हिन्दुओं की आस्था में मददगार साबित हो रहा है। दरअसल, दाऊद 25 सालों से शिवभक्तों के लिए कांवड़ तैयार करने का काम करता है। दाऊद बूढ़ा हुआ तो अब उसके बेटों ने कांवड़ बनाने की विरासत को संभाल लिया है।
शिवभक्तों के कांधे पर सजने वाली कांवड़ को बनाने का काम बिजनौर में एक मुस्लिम परिवार कर रहा है। वो है नजीबाबाद के रहने वाले दाऊद का परिवार। शुरुआत में उसने रोजगार के लिहाज से यह काम शुरू किया था जोकि अब तक जारी है। उसका परिवार पिछले 25 सालों से कांवड़ बनाने का काम करता है। दाऊद बूढ़ा हो चला तो अब उसके बेटों ने भी कांवड़ बनाने की विरासत को संभाल लिया है। हर साल की तरह इस साल भी शिवरात्रि से पहले पूरा परिवार कांवड़ बनाने में जुटा हुआ है।
नवंबर से बना रहे हैं कांवड़
दाऊद के बेटे तालिब और आरूष नजीबाबाद से सामान लाकर बिजनौर में कांवड़ बना रहे हैं। नजीबाबाद में भी कांवड़ बनाई जाती हैं। जहां, परिवार के दूसरे लोग लगे हैं। उनका पूरा परिवार नवंबर से शिवरात्रि के लिए कांवड़ बनाने की तैयारी कर रहा था। कांवड़ बनाने में बांस की खप्पच, सुतली, बांस का डंडा आदि का प्रयोग किया जाता है। एक कांवड़ को बनाने में करीब 200 रुपये का खर्चा आता है। तालिब ने बताया कि कांवड़ में लगने वाली कंडी को नजीबाबाद से ही बनाकर लाया जाता है। इसके बाद शिवरात्रि से पहले बिजनौर में कांवड़ तैयार की जाती है।
यह भी पढ़ें: UP Chunav 2022: पहले चरण की 58 सीटों का मूड, मुस्लिमों में सबसे कम, दलितों में हुआ ज्यादा बिखराव, पढ़िए पूरा समीकरण
तालिब ने बताया कि हर साल शिवरात्रि के मौके पर करीब 500 कांवड़ बिक जाती हैं। कांवड़ बनाने के सामान को नवंबर से तैयार किया जा रहा है। पिता से ही कांवड़ बनाना सिखा है।
यह भी पढ़ें: ट्विटर वार : चौधरी जयंत ने लिखा- आशीष मिश्र की जमानत से योगी जी इतने खुश क्यों?