बिजनौर में परिषदीय स्कूलों की खेल प्रतिभाओं को निखारने पर जोर तो दिया जा रहा है, लेकिन बजट किसी मजाक से कम नहीं है। जिले के लिए आए खेल बजट पर नजर डालें तो दो लाख 42 हजार विद्यार्थियों के लिए मात्र एक लाख 20 हजार का बजट आया है। ऐसे में शिक्षा विभाग इस बजट में पचास पैसे में ध्यानचंद और सचिन तेंदुलकर जैसे खिलाड़ी तैयार कैसे करेगा, इसका जवाब किसी के पास नहीं है। बजट के बंटवारे पर नजर डालें तो जिला स्तर की खेल प्रतियोगिता के लिए मात्र 60 हजार रुपये ही स्वीकृत हुए हैं। पांच हजार प्रति ब्लॉक के लिहाज से 60 हजार का बजट और दिया गया है।
राष्ट्रीय स्तर पर खेल प्रतियोगिता के लिए बेशक बड़ी धनराशि खर्च की जाती रही हो, मगर स्कूली स्तर से लेकर जिला स्तर तक खेल प्रतियोगिताओं को निखारने के लिए शासन भी बजट देने में कंजूसी करता रहा है। वर्तमान शिक्षा सत्र में जिले में करीब दो लाख 42 हजार छात्र-छात्राएं पंजीकृत हैं। इन छात्र-छात्राओं की न्याय पंचायत स्तर पर खेल प्रतियोगिताएं कराई जाती हैं। लेकिन बजट की व्यवस्था शासन की ओर से नहीं की जाती।