आरोप है कि साजिद और गुड्डू ने बिजनौर में तैनात इन दोनों सिपाहियों के संग मिलकर 27 जनवरी की सुबह मेरठ-पौड़ी नेशनल हाईवे पर बैराज के पास सिगरेट से भरे हुए एक ट्रक को रोक लिया था।
कार में सवार होकर आए इन आरोपियों ने खुद को एनसीबी (नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो) का अधिकारी बताया। जिन्होंने जांच के नाम पर ट्रक के चालक तारिक पुत्र इशरत से कागज दिखाने को कहा। कागज नहीं दिखाने पर आरोपियों ने ट्रक को कब्जे में लेकर गांव खेड़की के पास एक मंडी में खड़ा कर दिया। वहीं ट्रक के चालक इशरत को अपने साथ ले गए। जिसे सोनू यादव के आवास पर बंधक बनाकर रखा गया। चालक के फोन से ही ट्रक के स्वामी को फोन कराया और 20 लाख रुपये मांगे गए। रकम नहीं देने पर चालक को जेल भेजने की धमकी दी। बिजनौर पहुंचकर ट्रक स्वामी सालिम निवासी भीकनपुर मूढा अमरोहा ने रिपोर्ट दर्ज कराई।
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एसपी दिनेश सिंह ने मामले के खुलासे के लिए तीन टीमों का गठन किया था। पुलिस टीमों ने ट्रक को बरामद करते हुए आरोपियों को भी दबोच लिया। हालांकि ट्रक से सिगरेट गायब है।
सिपाही सोनू पर पहले भी लग चुका है वसूली का आरोप, हुआ था मुकदमा दर्ज
अवैध वसूली के मामले में सिपाही सोनू यादव का नाम पहली बार ही सामने नहीं आया है, बल्कि इससे पहले भी उस पर वसूली के आरोप लग चुके हैं। पुलिस सूत्रों की माने तो साल 2019 में नजीबाबाद क्षेत्र में ट्रक की टक्कर से एक बुजुर्ग महिला की मौत हो गई थी। इस हादसे के बाद ट्रक चालक मौके से फरार हुआ तो सिपाही सोनू यादव ने पीछा कर उसे पकड़ लिया और उससे वसूली कर फिर से भगा दिया था। इस मामले में उस वक्त सिपाही सोनू यादव के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज हुई थी।
हालांकि पिछले महीने की दो तारीख को कोर्ट ने 2019 में दर्ज हुए इस मामले में बरी कर दिया था। अब फिर से सिगरेट से भरे ट्रक को रोककर वसूली करने के प्रयास में सिपाही सोनू यादव को जेल जाना पड़ गया। सूत्रों का कहना है कि सोनू यादव अक्सर ऐसे लोगों पर भी नजर रखता था जो कि शौकीन मिजाज के हैं। कॉल गर्ल बुलाने वाले लोगों पर भी उसकी नजर रहती थी।
उधर, सिगरेट से भरे ट्रक के मामले में अब गिरफ्तार किए गए दोनों सिपाही निलंबित कर दिए गए हैं। वही मुरादाबाद में तैनात दो सिपाहियों पर भी कार्रवाई की जाएगी।