कौड़िया वन रेंज के कंडरावाली में एक किसान के खेत में हाथी का शव दबा मिला। ग्रामीणों की सूचना पर वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची और शव को निकलवाया। बुधवार को तीन चिकित्सकों के दल ने कंकाल के रूप तब्दील हो चुके हाथी के अवशेषों का पोस्टमार्टम किया। हाथी के दांत गायब मिले।
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बिजनौर वन प्रभाग नजीबाबाद के कौड़िया वन रेंज में करीब एक माह से खेत में दबे हाथी का कंकाल मंगलवार को मिला। इसके बाद स्थानीय वनाधिकारियों के पसीने छूट रहे हैं। मुरादाबाद वन संरक्षक रमेश चंद्रा ने खुद नजीबाबाद पहुंचकर खेत में दबे हाथी के मामले का सनसनीखेज खुलासा किया। प्रकरण की स्थानीय वनाधिकारियों को भनक तक न होना अधिकारियों की उदासीनता और संलिप्तता दर्शाता है।
बुधवार को वन क्षेत्राधिकारी राजेंद्र सिंह नेगी की उपस्थिति में तीन पशु चिकित्साधिकारियों डॉ. एसएम सिंह नजीबाबाद, डॉ. कर्मवीर सिंह भागूवाला, डॉ. कासिम अली किरतपुर ने हाथी के अवशेषों का पोस्टमार्टम किया। इस प्रकरण में वन विभाग के अधिकारी चुप्पी साधे हैं। जानकारी के लिए वन विभाग के स्थानीय वन अधिकारियों ने मीडिया के फोन अटैंड नहीं किए।
तीन वर्ष का था नर हाथी
पोस्टमार्टम में हाथी की अनुमानित आयु करीब तीन वर्ष और उसके नर होने की पुष्टि हुई है। ये हाथी युवा था और जिस तरह इसका विकास हो रहा था, उससे यह बेहद खास हाथी माना जा रहा है। पोस्टमार्टम टीम ने हाथी के जबड़े, स्कल, फुटपैड और शरीर के अन्य अवशेषों का पोस्टमार्टम किया। पोस्टमार्टम टीम ने पैल्विक गर्डिल से उसके नर होने की पुष्टि की है।
हाथी के नहीं मिले दांत
हाथी का शव लगभग काफी गहराई में दबाया गया था। वन विभाग को हाथी के शरीर के मिट्टी में समा चुके अंग टुकड़ों के रूप में मिले हैं। हाथी के दांत वन विभाग मिट्टी में तलाश कर रहा है। हाथी के दांत न मिलना उसके शिकार किए जाने की ओर संदेह उत्पन्न करता है।
एक माह पूर्व दबाया गया था हाथी
कंडरावाली के आरक्षित वन क्षेत्र से सटे जिस खेत में हाथी दबाया गया था। वह घटना एक माह पूर्व होने का अनुमान है। हाथी के शरीर का अधिकांश भाग मिट्टी में समा चुका है। जेसीबी से शव खोदते ही भयंकर दुर्गंध ने वन विभाग और चिकित्सक दल को बेचैन कर दिया।
किसान से पूछताछ में खुलेंगे राज
चांदपुर निवासी जिस किसान के खेत में हाथी दबाया गया था। उससे हाथी मौत प्रकरण के कई राज खुलने की संभावना है। हाथी की मौत इलेक्ट्रिक फेंसिंग से हुई या दांत के लिए उसे मारा गया, इसका राज भी किसान खोलेगा। मौत के बाद हाथी को दफनाते समय वन विभाग तक भनक आखिर क्यों नहीं पहुंची, किसान के माध्यम से ही इस बात का खुलासा होगा।
ये बोले वन संरक्षक
हाथी के अवशेषों के पोस्टमार्टम की रिपोर्ट की प्रतीक्षा है। विभिन्न बिंदुओं से विभागीय जांच की जा रही है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही हाथी की मौत के संबंध में पता चलेगा। विभागीय उदासीनता की भी गंभीरता से जांच की जा रही है। - रमेश चंद्रा, वन संरक्षक, मुरादाबाद।