गंगा में बढ़ा डॉल्फिन का कुनबा
बिजनौर। गंगा में डॉल्फिन का कुनबा बढ़ गया है। पिछले साल के मुकाबले इस साल गणना में तीन डॉल्फिन अधिक दिखी हैं। पिछले साल गंगा में बिजनौर से नरोरा तक 33 डॉल्फिन दिखी थीं। इस बार डॉल्फिन की संख्या बढ़कर 36 हो गई है। गणना में डॉल्फिन के तीन बच्चे भी दिखे हैं। डॉल्फिन की संख्या बढ़ने से वर्ल्ड वाइल्ड फंड की टीम भी गदगद है।
गंगा में रहने वाली डॉल्फिन को गांगेय डॉल्फिन कहा जाता है। केंद्र सरकार ने गंगा में रहने वालीं डॉल्फिन को राष्ट्रीय जलीय जीव घोषित कर रखा है। ‘मेरी गंगा, मेरी सूंस’ अभियान के तहत डॉल्फिन की गिनती की जाती है। बिजनौर में गंगा बैराज से नरौरा तक 225 किलोमीटर की गंगा की धारा में डॉल्फिन की गिनती की जाती है। वर्ल्ड वाइल्ड फंड की टीम के साथ इस बार ब्रिटेन से आईं डा.ग्रिल ब्रोलिक भी टीम के साथ थीं। इस बार 9 सितंबर से गंगा बैराज के बजाए बालावाली से गणना शुरू की गई थी। साथ ही डॉल्फिन की गणना में इस साल जीपीएस का इस्तेमाल किया गया था। जहां डॉल्फिन दिखीं थी उसे जीपीएस से चिह्नित किया गया था। गंगा में इस साल डॉल्फिन का कुनबा बढ़ा गया है। पिछले साल गंगा में 33 डॉल्फिन दिखी थीं। इस साल डॉल्फिन का कुनबा बढ़कर 36 हो गया है। टीम को गंगा में अभियान के दौरान डॉल्फिन के तीन बच्चे भी दिखे हैं। डॉल्फिन की संख्या बढ़ने से वर्ल्ड वाइल्ड फंड की टीम गदगद है। वर्ल्ड वाइल्ड फंड के वरिष्ठ परियोजना निदेशक संजीव यादव के अनुसार गंगा में डॉल्फिन की संख्या बढ़ना शुभ संकेत है। इससे पता चलता है कि गंगा में डॉल्फिन को अनुकूल वातावरण मिल रहा है और गंगा का पानी भी साफ है। आने वाले समय में डॉल्फिन की संख्या और बढ़ेगी। वर्ल्ड वाइल्ड फंड के कोआर्डिनेटर मोहम्मद शाहनवाज खान के अनुसार गंगा में डॉल्फिन की संख्या पहले से बढ़ी है। गंगा में लगातार डॉल्फिन की संख्या बढ़ रही है।
बालावाली में फिर हो सकती है गणना
इस बार डॉल्फिन की गणना बालावाली घाट से शुरू की गई थी। वर्ल्ड वाइल्ड फंड की टीम ने अनुमान लगाया था कि बरसात के समय गंगा बैराज के गेट खोल दिए जाते हैं। तब डॉल्फिन पुल के दूसरी ओर जा सकती है। टीम को बालावाली में कोई डॉल्फिन नहीं दिखी। हालांकि गांव वालों ने टीम को बताया कि उन्होंने वहां डॉल्फिन देखी है। टीम वहां फिर से गणना करने की प्लानिंग कर रही है।
तरंगों से करती हैं शिकार
गंगा की डॉल्फिन विश्व में डॉल्फिन की दुर्लभ प्रजातियों में से एक है। यह गंगा के अलावा ब्रह्मपुत्र, मेघना और करनाफुल्ली नदी में भी पाई जाती हैं। ये नदी की सतह पर आकर सांस लेती हैं। सांस लेने के वक्त होने वाली ध्वनि के कारण इन्हें सूंस नाम दिया गया है। यह डॉल्फिन अंधी होती हैं और तरंगों से शिकार करती हैं।
बिजनौर में दिखीं दस डॉल्फिन
बिजनौर क्षेत्र में पिछले साल सात डॉल्फिन दिखी थी, जबकि इस साल जिले में वर्ल्ड वाइल्ड फंड की टीम को दस डॉल्फिन दिखी हैं। इससे पहले भी जिले में दस डॉल्फिन तक दिख चुकी हैं।
साल डॉल्फिन(बिजनौर से नरौरा तक)
2015 22
2016 30
2017 32
2018 33
2019 36