लिंगानुपात में 11वें स्थान पर पहुंचा बिजनौर जिला
बिजनौर। जिले के लोगों को बेटियां भाने लगी हैं। जिले में प्रति हजार लड़कों के हिसाब से लड़कियों का आंकड़ा 950 पर पहुंच गया है। यह एक अच्छा संकेत है। जिले में बेटियों का कुनबा बढ़ रहा है। बेटियां हर क्षेत्र में नाम रोशन कर रही हैं। सभी लोग ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ के प्रति जागरूक हो रहे हैं।
बेटियों को देवी स्वरूप माना जाता है। इसके लिए केंद्र सरकार काफी गंभीर है। इसी को ध्यान में रखते हुए सरकार ने ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ अभियान की शुरुआत की थी। यह अभियान अब आंदोलन का रूप ले चुका है। दिल्ली से लेकर छोटे से गांव तक में बेटियों को बचाने की मुहिम को धार दी जा रही है। बेटी के बिना समाज का कोई अस्तित्व नहीं है। इस संदेश को जन जन तक पहुंचाने के लिए विभिन्न स्तरों से जागरूक किया जा रहा है। इस अभियान में बेटी बचाने और बेटी पढ़ाने का संदेश देने के लिए जागरूकता कार्यक्रमों को माध्यम बनाया गया है।
पीसीपीएनडीटी के नोडल अधिकारी को डीएम ने इसके लिए निर्देशित किया है कि हर हालत में बेटियों को सुरक्षित रखा जाए। पैदा होने से पहले ही कोख में बेटी का कत्ल न हो।
जिला प्रोबेशन अधिकारी संजय कुमार के अनुसार लगभग तीन साल पहले बिजनौर जनपद भारत के 100 और प्रदेश सरकार की 61वें खराब स्थिति वाले जनपदों में शामिल था। वर्तमान में यह प्रदेश की 11 वीं रैंकिंग में पहुंच गया है, जो बेहद ही अच्छा संकेत है। पिछले तीन वर्षों में यह आंकड़ा 883 पर था, जो अब 945 प्रति हजार पर पहुंच गया है। इस दौरान बिजनौर की स्थिति में पहले से सुधार हुआ है।जिला प्रोबेशन अधिकारी ने बताया कि बेटी को ईश्वर का वरदान है। बेटी के बिना कोई समाज नहीं है। जिलेवासी बेटियों के जन्म को ईश्वर का आशीर्वाद मानकर स्वीकार करें। बेटियों को बचाने और पढ़ाने में सभी सहयोग दें। बेटी बचाने के अभियान में हर परिवार को जोड़ा जाएगा।