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Bijnor: बहू ने संभाली 40 साल पुरानी परंपरा, सास के साथ थामी कांवड़, परिवार के 15 लोग हरिद्वार से ला रहे जल

Fri, 07 Aug 2026 10:24 AM IST
Mohd Mustakim अमर उजाला नेटवर्क, बिजनौर

सार

बुलंदशहर के एक परिवार के 15 सदस्य मिलकर कांवड़ ला रहे हैं। इसमें बुजुर्ग से लेकर मासूम बच्चे तक शामिल हैं। जब यह परिवार नजीबाबाद से होकर गुजरा तो सबके आकर्षण का केंद्र बन गया।  
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कांवड़ लेकर निकला सौदान सिंह का परिवार। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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श्रावण माह की कांवड़ यात्रा के दौरान श्रद्धा, भक्ति और परंपरा का अनोखा संगम देखने को मिल रहा है। बुलंदशहर का एक परिवार कांवड़ लाने की 40 साल पुरानी परंपरा को आज भी निभा रहा है। इस बार तो सास के साथ बहू ने भी कांवड़ थामी। परिवार के सदस्य एक छोटे बच्चे को भी गोद में लेकर चल रहे हैं।
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पुुष्पा और उसकी सास कंसीदिया। - फोटो : अमर उजाला
कांवड़ियों का यह परिवार हरिद्वार से गंगाजल लेकर नजीबाबाद होते हुए बुलंदशहर अपने गांव दरिया आलमपुर जा रहा है। जत्थे में शामिल सौदान सिंह ने बताया कि उनके पिता एक बार बीमार हो गए थे। तब उन्होंने भोलेनाथ की कांवड़ लाने का बीड़ा उठाया। 15-16 साल की आयु में पहली पैदल कांवड़ लेकर गए। भोलेनाथ की भक्ति और शक्ति से कांवड़ यात्रा में धीरे-धीरे परिवार के अन्य सदस्य जुड़ने लगे। 
 

अब परिवार का छोटे से बड़ा हर सदस्य कांवड़ यात्रा में शामिल होता है। इस बार उनका पुत्र रामपाल, पुत्रवधू रजनी, भतीजा विजय और विजय की पत्नी कंसीदिया भी शामिल हैं। साथ ही विजय का बेटा अमित और पुत्रवधू पुष्पा भी कांवड़ यात्रा में परिवार के साथ हैं। सास कंसीदिया और बहू पुष्पा दोनों इस यात्रा में एक-दूसरे के सहारा बनी हुई हैं। 
 
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सौदान सिंह ने बताया कि उनके हृदय का ऑपरेशन हुआ है लेकिन कांवड़ लाने की परंपरा को उन्होंने नहीं छोड़ा। इस बार उनके साथ परिवार के रोहन, गौरव, शिवानी, आशु, टीटू समेत 15 लोग हैं, जिनमें सबसे छोटा सदस्य डेढ़ साल का सोनू शामिल हैं। परिवार के सदस्य उसे गोद में लेकर चल रहे हैं।

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