हरिद्वार से पैदल घर लौट रहे बरेली के युवक
बिजनौर/नगीना/। लॉकडाउन के बीच हरिद्वार में रहकर काम करने वाले बिजनौर और अन्य जिलों के लोगों का पैदल घर लौटना जारी है। शुक्रवार को भी बरेली निवासी आठ युवकों का एक जत्था मंडावर पहुंचा। भूखे-प्यासे इन युवकों को यहां के निवासियों ने जलपान कराकर रवाना किया।
लॉकडाउन के बाद हरिद्वार की सभी कंपनियां बंद हो गई हैं। इन कंपनियों में काम करने वाले दूसरे जिलों के हजारों लोग वहीं फंस गए हैं। ये लोग अब हर हाल में अपने घर जाना चाहते हैं। परिवहन सेवा बंद होने से ये लोग पैदल ही अपने घरों की ओर निकल पड़े हैं। शुक्रवार को बरेली निवासी आठ युवकों का एक जत्था पैदल चलकर मंडावर पहुंचा। पूछने पर उन्होंने बताया कि वे सभी युवक बरेली जिले के गांव मीरगंज के रहने वाले हैं। हरिद्वार के सिडकुल की फैक्ट्री में ठेकेदारी करने वाला एक ठेकेदार 20 मार्च को उन्हें अपने साथ लेकर गया था। उन्होंने एक दिन ही काम किया था तभी लॉकडाउन के कारण फैक्ट्री बंद हो गई। उनके पास जो पैसे थे वो भी एक-दो दिन में खर्च हो गए। अब उनके पास घर लौटने के अलावा कोई चारा नहीं बचा था। इसलिए बृहस्पतिवार की शाम को पैदल ही अपने घरों के लिए निकल पड़े। मंडावर पहुंपचे भूखे-प्यारे इन युवकों को यहां के निवासियों ने जलपान कराया और जरूरी सामग्री देकर गंतव्य की ओर रवाना कर दिया।
वहीं, शुक्रवार सुबह देहरादून से पैदल चलकर नगीना रेलवे स्टेशन परिसर पहुंचे मजदूरों के एक जत्थे को जब लोगों ने देखा तो उन्होंने इसकी सूचना समाजसेवी शेख अजीमुर्रहमान को दी। उन्होंने उनके लिए बिस्कुट, केले, पानी की बोतल, ब्रेड और मक्खन की व्यवस्था कराई। थाना प्रभारी निरीक्षक राजेश तिवारी ने करीब 30 मजदूरों के जत्थे को बस से मुरादाबाद जिले की सीमा तक पहुंचाने की व्यवस्था की। मजदूरों ने बताया कि वह पीलीभीत बरेली और मुरादाबाद के रहने वाले हैं।
पूरे दिन बैराज पर भूखे प्यासे पडे़ रहे लोग
बिजनौर। बाहर से आ रहे लोगों को पुलिस ने बैराज से आगे नहीं बढ़ने दिया। दिन भर ये लोग भूखे, प्यासे बैैराज के पुल पर पड़े रहे। बाहर से आने वाले लोग बड़ी संख्या में पैदल बैराज पर पहुंचे। बैराज पुल से आगे उन्हें पुलिस ने नहीं बढ़ने दिया। नोएडा से लोगों को लेकर नजीबाबाद जा रही एक बस को भी पुलिस बैराज पुल पर रोक लिया। बस का चालक पुलिस से कहता रहा कि प्रमुख सचिव के निर्देश पर यह बस लोगों को लेकर आई है। पर पुलिस ने चालक की एक नहीं सुनी। नगीना निवासी मोहित मोहन ने बताया कि वह बंगलूरू में नौकरी करते हैं। कई दिन पहले वहां से आए थे। बीच में अपने दोस्त के यहां रुकने के बाद किसी तरह घर जाने के लिए बैराज तक पहुंचे, लेकिन पुलिस उन्हें घर नहीं जाने दे रही है। मोहित मोहन ने बताया कि बैराज के पुल पर तमाम लोग भूखे प्यासे पड़े हैं। पर किसी को भी पुलिस बिजनौर की ओर आने नहीं दे रही है। वहीं, रेहड़ के गांव पैगंबरपुर निवासी पांच व्यक्ति उत्तराखंड के श्रीनगर में मजदूरी हैं। दोनों बुधवार को अपने गांव आ गए। ग्रामीणों के कहने पर शुक्रवार को सभी पीएचसी पर जांच कराने पहुंचे। पीएचसी प्रभारी डॉ रजनीश कुमार ने बताया की सभी को घर पर ही रहने की सलाह दी गई है। पुलिस ने रायपुरी बार्डर पर आने जाने वाली सभी गाड़ियों को रोक कर यात्रियों के स्वास्थ्य परीक्षण किया तथा गाड़ियों को सैनिटाइज किया।
19 घंटे पैदल चल दिल्ली से घर पहुंचे चार लोग
नींदडू़। लॉकडाउन के बाद दिल्ली में फंसे चार व्यक्ति करीब 200 किलोमीटर की दूरी पैदल तय करते हुए 19 घंटे बाद किसी तरह अपने घर पहुंचे। चारों व्यक्ति कामकाज के सिलसिले में दिल्ली गए हुए थे। इसी बीच लॉकडाउन का एलान हो गया। लॉकडाउन में यातायात के साधन बंद होने के कारण बृहस्पतिवार को सुबह चार बजे दिल्ली से घर के लिए निकले चारों व्यक्ति रात के 11 बजे नींदडू़ से सटे अपने गांव पहुंचे। बुरी तरह थके इन लोगों के मुताबिक पुलिस द्वारा रास्ते में पड़ने जाने पर कई स्थानों पर उनकी चेकिंग हुई।
देहरादून से नगीना होकर गुजर रहे मजदूरों को खाद्य सामान वितरित करते समाजसेवी शेख़ अजीमु रहमान व स- फोटो : BIJNOR