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बैंडबाजा और बरात, खूब हुआ धूम धड़ाका

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बैंडबाजा और बरात, खूब हुआ धूम धड़ाका
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बिजनौर। कोरोना की दूसरी लहर का प्रकोप थमने के बाद जिले में देवोत्थान एकादशी पर बैंक्वेट हॉलों में शादियां हुईं। कोई भी बैंक्वेट हॉल खाली नहीं रहा। स्कूल से लेकर धर्मशाला तक बुक रहीं। रविवार को शहर में करीब आठ महीने बाद शहनाइयों की गूंज सुनाई दी। शादियों के कारण सड़काें पर भी जाम जैसे हालात रहे।
जिले भर में 150 से ज्यादा बैंक्वेट हॉल संचालित हैं। कोरोना की मार्च में जब दूसरी लहर शुरू हुई थी तब सहालग का सीजन चल रहा था। लॉक डाउन लगा तो बैंक्वेट हॉल में होने वाली शादी के कार्यक्रम स्थगित हो गए थे। कार्यक्रम या तो कुछ दिनों के लिए टाल दिए गए या फिर दूल्हा दुल्हन ने घरों में ही फेरे लिए। बाद में सहालग खत्म होने पर बैंक्वेट हॉल में तभी से शहनाइयों की गूंज बंद थी, लेकिन रविवार को देवोत्थान एकादशी से सभी बैंक्वेट हॉल शहनाई की आवाज से गूंज उठे। इस दिन शादी का श्रेष्ठ मुहूर्त होने और नवंबर दिसंबर में सहालग कम होने से इस दिन ज्यादा शादी हुईं। बैंक्वेट हॉल मालिकों ने भी अपने प्रतिष्ठानों को कई महीने बाद शानदार तरीके से सजाया।
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जिले में सभी बैंक्वेट हॉल में दिन और रात दोनों समय शादी हुई। बैंक्वेट हॉल में जगह न मिलने पर कई जगह स्कूलों, धर्मशालाओं और पार्क में भी शादियां हुईं। गांवों में भी खूब शादी हुईं। डीजे और बैंड बाजों के साथ खूब बरात चढ़ाई गईं। कोरोना के बाद पहली बार हुई शादियों में मेहमानों की भी अच्छी खासी भीड़ रही। हर किसी ने दावतों का आनंद लिया। जिले भर में सैकड़ों शादी हुईं। शादी का सीजन शुरू होने से हलवाई, काउंटर, बैंड बाजे और बैंक्वेट हॉल में तरह तरह का काम करने वाले लोगों को भी रोजगार मिल गया है। राजमिलन बैंक्वेट हॉल के मालिक एमपी सिंह ने बताया कि इस बार सहालग पर पहले से अच्छी बुकिंग हुई है। शादी के शगुन वाला कोई भी दिन खाली नहीं है। कई दिन तो सुबह और रात दोनों समय कार्यक्रमों की बुकिंग है।
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