ऑक्सीजन बनाने के केमिकल पर रोक
बिजनौर। कोरोना मरीजों के लिए ऑक्सीजन सिलेंडरों को रिजर्व भले ही कर दिया गया हो, लेकिन जिले में ऑक्सीजन गैस बनाने के लिए जरूरी केमिकल देने पर रोक लगा दी गई है। जिले में ऑक्सीजन बनाने की फर्म है। इनमें एक फर्म हर रोज 100 से 150 सिलेंडर गैस बना लेती है। अब फर्म प्रोपराइटर ने मेडिकल सप्लाई के लिए ऑक्सीजन सिलेंडर भरने को अनुमति और केमिकल मांगा है। इससे जुड़ी फाइल शासन को भेजी गई है।
ऑक्सीजन सिलेंडर की कमी के मामले कई राज्यों में सामने आ रहे हैं। ऑक्सीजन सिलेंडर अस्पतालों के अलावा औद्योगिक इकाइयों में भी सप्लाई होती है। ऑक्सीजन से औद्योगिक इकाइयों में वेल्डिंग आदि काम होते हैं। दोनों ऑक्सीजन एक ही तरह की होती हैं, लेकिन इनका केमिकल अलग-अलग होता है। अगर किसी के पास उद्योगों को ऑक्सीजन सप्लाई करने का लाइसेंस है तो वह अस्पतालों को ऑक्सीजन नहीं दे सकता और किसी के पास अस्पतालों को ऑक्सीजन सप्लाई करने का लाइसेंस है तो वह उद्योगों को ऑक्सीजन सिलेंडर नहीं देता है।
कोरोना की भयावहता को देखते हुए प्रदेश में उद्योगों में ऑक्सीजन सिलेंडर के इस्तेमाल पर रोक लगा दी गई है। जिले में एक फर्म ऑक्सीजन बनाने का काम कर रही है, लेकिन इसके पास उद्योगों को ही ऑक्सीजन सप्लाई करने का लाइसेंस है। फर्म को ऑक्सीजन बनाने में इस्तेमाल होने वाला केमिकल भी नहीं दिया जा रहा है। अब फर्म ने अस्पतालों को भी ऑक्सीजन सिलेंडर सप्लाई करने की अनुमति मांगी है। शासन को इस संबंध में लिखा गया है। अनुमति मिलने के बाद अस्पतालों को ऑक्सीजन सप्लाई होगी। इससे जिले में मरीजों के लिए ऑक्सीजन की कमी नहीं रहेगी।
नहीं मिल रहा लिक्विड
ऑक्सीजन बनाने में किरायो लिक्विड का इस्तेमाल होता है। यह बाहर से आता है। यह केमिकल अभी उन्हीं फर्म को दिया जा रहा है जो अस्पतालों को ऑक्सीजन सप्लाई करती हैं। जिले में यह केमिकल नहीं दिया जा रहा है। इससे ऑक्सीजन बनाने का काम प्रभावित हो गया है। कन्हैया ऑक्सीजन सेल्स कारपोरेशन के प्रोपराइटर अतुल अग्रवाल के अनुसार अभी ऑक्सीजन बनाने के लिए केमिकल नहीं मिला है। ऑक्सीजन अस्पतालों को सप्लाई करने की अनुमति के लिए शासन को पत्र लिखा गया है।