गंगा तटीय गांवों में होगी बांस और लेमन ग्रास की खेती
बिजनौर। नमामि गंगे योजना के अंतर्गत गंगा किनारे के गांवों में अब बांस और लेमन ग्रास की खेती कराई जाएगी। इनमें रासायनिक उर्वरकों का प्रयोग बिल्कुल नहीं होने दिया जाएगा। इसके अलावा बाकी औषधीय गुण वाली फसलों की खेती को भी प्रेरित किया जाएगा। कृषि विभाग इसके लिए लेमन ग्रास की दस हजार पौध मंगवा रहा है।
केंद्र व प्रदेश सरकार द्वारा गंगा को निर्मल बनाने पर बहुत जोर दिया जा रहा है। लेकिन ये तब तक संभव नहीं है जबकि गंगा किनारे के गांवों में जैविक खेती न होने लगे। गंगा की धारा लगातार तटों का कटान करते हुए चलती है। इससे गंगा किनारे के खेत कभी धारा में ही आ जाते हैं तो कभी एकदम किनारे पर। गंगा की धारा के पास अगर खेतों में रासायनिक उर्वरक डाले जाते हैं तो वह किसी न किसी तरह से गंगा की धारा में भी जाएंगे। इसे रोकने के लिए गंगा किनारे के पांच किमी के दायरे में आने वाले गांवों में जैविक खेती कराई जा रही है। 50 से अधिक गांवों को इस योजना में चयनित किया गया है। पिछले साल जिन किसानों ने गन्ने की जैविक खेती करके गुड़ बनाया था उसे नोडल कंपनी ने किसानों से घर से ही 70 रुपये प्रति किलो के भाव से खरीद लिया था। गंगा किनारे के गांवों के किसानों को अब औषधीय खेती से भी जोड़ा जा रहा है। इस साल गंगा किनारे के गांवों में बांस और लेमन ग्रास की खेती कराई जाएगी। लेमन ग्रास की दस हजार पौध भी वन विभाग द्वारा मंगवाई जा रही हैं। बांस की खेती नदी किनारे वैसे भी बहुत मुफीद रहती है। औषधीय गुण वाले पौधों की जैविक खेती करने से किसानों की आय और बढ़ेगी।
ये हैं गंगा किनारे के गांव
गंगा किनारे के गांव सबलगढ़, तैयबपुर गोरवा, रफीउलनगर उर्फ रावली, दयालवाला, खलीउल्लापुर, दयालवाला, बादशाहपुर, जहानाबाद, टीप, खेड़की हेमराज, कुंदनपुर, मोहिउद्दीनपुर, सैफपुर खादर, तैय्यबपुर काजी, कुंवर चतरभोजपुर, दारानगर, निजामतपुरा, रसूूलपुर पित्तनका, सलेमपुर मथना, बसंतपुर, सुजातपुर खादर, दत्तियाना आदि को योजना में शामिल किया गया है।
बांस करता है पानी की धारा को शुद्ध
बांस गंगा को प्राकृतिक रूप से शुद्ध करने का भी काम करता है। बांस की जड़ बहुत घनी होती है और उसमें कई तरह के तत्व रहते हैं। अगर पानी की धारा के पास ये हों तो ये पानी में मौजूद हैवी मेटल्स को निष्क्रिय कर देते हैं। ये पानी को शुद्ध करते हैं।
गांवों से बिक रहे जैविक उत्पाद
जिला कृषि अधिकारी औषधीय खेती हमेशा लाभदायक होती है। किसानों को गंगा किनारे बांस और लेमन ग्रास की जैविक खेती को जागरूक किया जा रहा है। जल्दी ही इनकी खेती गंगा किनारे के गांवों में शुरू करा दी जाएगी। किसानों के जैविक उत्पाद गांवों से ही बिक रहे हैं।