फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

‘आजाद’ ने बिजनौर में सीखी थी निशानेबाजी

विज्ञापन
भोलानाथ त्यागी। - फोटो : BIJNOR
विज्ञापन
‘आजाद’ ने बिजनौर में सीखा था निशाना लगाना
विज्ञापन

विवेक गुप्ता
बरूकी (बिजनौर)। महान क्रांतिकारी चंद्रशेखर आजाद का नाता जनपद बिजनौर से भी रहा। ग्राम पैजनिया निवासी क्रांतिकारी शिवचरण त्यागी से उनके गहरे संबंध रहे। वह जनपद बिजनौर की सीमा में छुप कर रहे और उन्होंने निशानेबाजी का अभ्यास भी किया था। क्रांतिकारी चंद्रशेखर आजाद अपने अज्ञातवास के दौरान नाथूपुर निवासी भवानी सिंह रावत के आग्रह पर दुगड्डा रहने के लिए आए थे। 1930 में वह रेलगाड़ी से नजीबाबाद तक आए और यहां से दुगड्डा तक पैदल ही गए।
बिजनौर के इतिहास के जानकार ग्राम फीना निवासी हेमंत कुमार बताते हैं कि आजाद एक ही स्थान पर एक माह से अधिक नहीं रुकते थे। दुगड्डा से वह किसान का वेश बनाकर कंडी मार्ग से हरिद्वार के निकट चंडी मंदिर के पास पहुंचे। हेमंत कुमार के अनुसार चंद्रशेखर आजाद मुख्य मार्गों पर नहीं चलते थे। वह खेतों या वनों का रास्ता चुनते थे। इसके बाद आजाद अपने साथियों रामचंद्र, हजारीलाल, छैल बिहारी, विशंभर दयाल के साथ चंडी मंदिर के निकट रहने लगे थे।
विज्ञापन

जनपद के वरिष्ठ साहित्यकार तथा प्रसिद्ध क्रांतिकारी शिवचरण त्यागी के नवासे भोला नाथ त्यागी बताते हैं कि उनके नाना शिवचरण त्यागी से आजाद के संबंध सन 1922 से ही रहे। आजाद कजरी वन में रुके थे, यह हाथी के क्षेत्र वाला वन था। आजाद और उनके साथियों के लिए कजरी वन सुरक्षित ठिकाना था। वहां आजाद अपने साथियों के साथ निशानेबाजी का अभ्यास किया करते थे। यह क्षेत्र उस समय जनपद बिजनौर में लगता था, बाद में यह क्षेत्र जनपद हरिद्वार का हिस्सा बन गया। भोला नाथ त्यागी के अनुसार उनके नाना शिवचरण त्यागी चंद्रशेखर आजाद के साथ रहे थे और उन्हें अभ्यास के लिए रिवाल्वर के कारतूस भी उपलब्ध कराए थे।
विज्ञापन

लगभग एक माह बिताने के बाद आजाद यहां से इलाहाबाद चले गए थे। दुगड्डा में जिस मकान में चंद्रशेखर आजाद ठहरे थे, वह मकान आज भी मौजूद है। जिस स्थान पर आजाद निशानेबाजी का अभ्यास करते थे, उसी स्थान पर आजाद पार्क बना दिया गया है। आजाद का जन्म 23 जुलाई 1906 को मध्यप्रदेश के अलीराजपुर जनपद के भाबरा गांव में हुआ था। चंद्र शेखर आजाद की मृत्यु इलाहाबाद के अल्फ्रेड पार्क में 27 फरवरी 1931 को हुई थी। वह जीवन भर देश की आजादी के लिए अंग्रेजों से लड़े। (संवाद)

स्व. शिवचरण त्यागी- फोटो : BIJNOR

हेमंत कुमार।- फोटो : BIJNOR

विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें