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शनि जयंती और सोमवती अमावस्या पर बन रहे शुभ संयोग

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शनि जयंती और सोमवती अमावस्या पर बन रहे शुभ संयोग
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बिजनौर। शनि जयंती ज्येष्ठ मास की अमावस्या को मनाई जाती है। इस बार शनि जयंती के दिन ही सोमवती अमावस्या पड़ रही है, जो एक शुभ संयोग है। सोमवती अमावस्या भी साल में एक या दो बार ही सोमवार के दिन पड़ती है। इस अमावस्या के दिन विवाहित स्त्रियां अपने पति की दीर्घायु के लिए व्रत रखती हैं।
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सिविल लाइन स्थित धार्मिक संस्थान विष्णुलोक के ज्योतिषविद पंडित ललित शर्मा ने बताया कि पुराणों में शनि को क्रूर एवं पाप ग्रहों में गिना जाता है। लेकिन शनि न्याय करने वाले देवता हैं और कर्म के अनुसार फल देने वाले फलदाता हैं। शनिदेव सूर्य एवं छाया की संतान हैं। ज्येष्ठ मास की अमावस्या को शनि का जन्म हुआ था। ज्येष्ठ मास की अमावस्या तिथि का प्रारंभ 29 मई को दोपहर दो बजकर 56 मिनट से शुरू हो गया है। जो 30 मई को शाम पांच बजे समाप्त होगी। इस बार शनि जयंती और वट सावित्री अमावस्या 30 मई को एक साथ मनाई जाएगी। इस दिन तीन शुभ संयोग बन रहे हैं। जो अखंड सौभाग्य की कामना से व्रत रखने वाली महिलाओं और शनि भक्तों के लिए शुभ फलदायी होंगे। इस दिन जरूरतमंद लोगों को भोजन, वस्त्र और जल दान करने से कभी समाप्त न होने वाला पुण्य मिलता है।
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शनि जयंती पर करें ये काम
इस दिन ओम शं शनिश्चरायै नम: का 108 बार पाठ करें।
शनि चालीसा का पाठ करें
किसी पवित्र नदी में स्नान करके पितरों के लिए दान पुण्य करें।
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