बिजनौर में बसपा ने जिले की आठ विधानसभा सीटों में से छह पर मुस्लिम प्रत्याशियों को तरजीह दी है। पार्टी के इस निर्णय से दलितों के साथ सवर्ण जाति के लोगों में नाराजगी व्याप्त हो गई है। कई सीटों पर दलितों ने पार्टी के ही निर्णय का विरोध सार्वजनिक रूप से करना शुरू कर दिया है। इससे पार्टी आलाकमान में भी खलबली मची हुई है। पार्टी कई सीटों पर रणनीति बनानी प्रारंभ कर दी है।
जिले में विधानसभा की आठ सीटों में से अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित नहटौर व नगीना सीट पर बसपा ने दलित समाज के प्रत्याशी उतारे हैं। नहटौर से विधायक ओम कुमार व नगीना से पूर्व विधायक रामेश्वरी देवी के पुत्र दीपक कुमार सिंह को चुनाव मैदान में उतारा है। दीपक कुमार सिंह का टिकट कटने की चर्चा जोरों पर है। दीपक कुमार पर आरोप है कि वह क्षेत्र में लोगों से संपर्क में नहीं जुटे हुए हैं। दीपक कुमार सिंह की जगह नजीबाबाद के पूर्व विधायक शीशराम सिंह पर बसपा नगीना सीट पर दांव खेलने पर विचार कर रही है। बाकी बची छह सीटों में चांदपुर से विधायक इकबाल ठेकेदार, धामपुर से विधायक मोहम्मद गाजी, बिजनौर से नहटौर नगर पालिका के चेयरमैन रशीद अहमद छिद्दू, नूरपुर से गौहर इकबाल, बढ़ापुर से फहद यजदानी का टिकट फाइनल हो चुका है।
नजीबाबाद से भी किसी मुस्लिम चेहरे को टिकट देने के लिए पार्टी किसी मजबूत प्रत्याशी को तलाश रही है। नजीबाबाद से तसलीम अहमद बसपा से विधायक थे। राज्यसभा व विधान परिषद चुनाव के दौरान तसलीम अहमद ने पाला बदलकर सपा का दामन थाम लिया। नजीबाबाद की खाली हुई सीट पर बसपा नेताओं ने तसलीम अहमद की जगह किसी मजबूत मुस्लिम प्रत्याशी की तलाश शुरू कर दी है। प्रॉपर्टी डीलर अहसान अहमद का नाम सबसे ऊपर चल रहा है। कई और मुस्लिम चेहरे टिकट लेने की लाइन में लगे हैं।
नूरपुर सीट से प्रत्याशी गौहर इकबाल के खिलाफ दलितों ने मोर्चा खोल दिया है। दलित इस सीट पर भी टिकट को बदलवाने की मांग कर रहे हैं। जिले की छह सीटों पर बसपा द्वारा मुस्लिम प्रत्याशियों को तरजीह देने से दलितों के साथ बसपा से जुड़े अन्य सवर्ण जाति के लोगों में भी गुस्सा है। पार्टी में मांग उठ रही है कि ठाकुर बहुल धामपुर, अफजलगढ़ या नूरपुर से किसी ठाकुर को टिकट दिया जाना चाहिए। जिले के किसी ठाकुर को टिकट न दिए जाने से ठाकुरों में नाराजगी है। टिकटों के बंटवारे को लेकर अब बसपा के राष्ट्रीय महासचिव नसीमुद्दीन सिद्दीकी की भी आलोचना शुरू हो गई है। यह लोग अपनी सीटों पर मजबूत अन्य जाति के लोगों को टिकट देने की वकालत कर रहे हैं। ऐसा न होने पर विधानसभा चुनाव में लोग बसपा को झटका दे सकते हैं।