गन्ना समितियों के चुनाव का हुआ एलान
बिजनौर। उप्र राज्य सहकारी समिति चुनाव आयोग ने गन्ना समितियों के चेयरमैन समेत त्रिस्तरीय चुनाव का एलान कर दिया है। जिले में नौ गन्ना समितियां हैं। चुनाव प्रक्रिया चार अगस्त से शुरू होगी। चेयरमैन का चुनाव 28 अगस्त को होगा। इस चुनाव में जिले में करीब पौने चार लाख किसान मतदाता मतदान करेंगे।
जिला चुनाव अधिकारी/ सहायक निबंधक सहकारी समितियां द्वारा गन्ना समितियों से अनंतिम चुनाव क्षेत्र अवधारण 10 जुलाई तक भेजने को पत्र भेजा जा रहा है। मुख्य चुनाव आयुक्त उप्र राज्य सहकारी समिति चुनाव आयोग लखनऊ पीके महान्ति द्वारा भेजे चुनाव कार्यक्रम के अनुसार सबसे पहले समितियों के प्रतिनिधियों अर्थात डेलिगेट का चुनाव होगा। इसके लिए अनंतिम मतदाता सूची का प्रदर्शन चार अगस्त, सूची पर आपत्ति दाखिल करना पांच अगस्त, आपत्तियों का निस्तारण छह अगस्त, उसी दिन अंतिम मतदाता सूची का प्रदर्शन, नामांकन पत्र दाखिल करना सात अगस्त, नामांकन पत्रों की जांच 10 अगस्त, वैध नाम निर्देशन का प्रदर्शन दस अगस्त, नाम वापसी तथा चुनाव चिह्न का आवंटन 11 अगस्त, मतदान 13 अगस्त को होगा। मतगणना तथा चुनाव परिणाम की घोषणा 13 अगस्त को ही चुनाव के बाद होगी।
प्रबंध कमेटी के सदस्यों अर्थात डायरेक्टर के लिए अनंतिम मतदाता सूची का प्रदर्शन 17 अगस्त, सूची पर आपत्ति 18 अगस्त, आपत्ति निस्तारण तथा अंतिम मतदाता सूची का प्रदर्शन 19 अगस्त, नामजदगी 20 अगस्त, नामांकन पत्रों की जांच तथा वैध सूची का प्रदर्शन 21 अगस्त, नाम वापसी तथा चुनाव चिह्न का आवंटन 24 अगस्त, मतदान 27 अगस्त, उसके बाद ही मतगणना तथा परिणाम की घोषणा होगी। सभापति, उपसभापति तथा अन्य समितियों को भेजे जाने वाले प्रतिनिधियों के चुनाव की अनंतिम मतदाता सूची का प्रदर्शन से लेकर मतदान व परिणाम घोषणा तक की सारी प्रक्रिया एक ही दिन 28 अगस्त को होगी। अपर सांख्यिकी अधिकारी सहकारिता सत्यपाल सिंह ने बताया कि अनंतिम क्षेत्र अवधारण की सूचना 10 जुलाई शुक्रवार तक समितियों से मांगी गई है। चुनाव घोषणा के साथ ही दावेदार सक्रिय हो गए हैं।
समितियों का कार्यकाल सवा साल पहले हो चुका है समाप्त
बिजनौर। जिले में धामपुर, चांदपुर, स्योहारा, नजीबाबाद, नगीना, हल्दौर, नूरपुर, बिजनौर, अफजलगढ़ में सहकारी गन्ना समितियां हैं। गन्ना समितियों का कार्यकाल आठ अप्रैल 2019 को समाप्त हो गया है। इसके बाद चुनाव का एलान भी हो गया था। परंतु मतदाता सूचियों के पोर्टल पर अपलोड नहीं होने तथा किसानों के गन्ना डालने में व्यस्त होने से चुनाव टल गए। इसके बाद शासन ने समितियों का कामकाज चलाने के लिए समितियां गठित कर दी थीं।