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Bijnor News: बिखरे पत्थरों को समेटकर भविष्य संवार रहीं अंकिता

Sun, 12 Oct 2025 12:22 AM IST
मेरठ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बिजनौर
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बिजनौर की डॉ. अंकिता राजपूत द्वारा पेबल्स आर्ट से तैयार पत्थरों की मूर्ति। संवाद - फोटो : katra news
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बिजनौर। अपना प्रकाश स्वयं बनो गौतम बुद्ध का यह उपदेश बिजनौर के गांव गजरौला शिव निवासी डॉ. अंकिता राजपूत चरितार्थ कर रही हैं। अंकिता ने पहले पेबल्स आर्ट में खुद की प्रतिभा निखारी। अब बिखरे पत्थरों को जोड़कर अपना और दूसरी महिलाओं का भविष्य भी संवार रही हैं। पेबल्स आर्ट के जरिए बिजनौर का नाम राष्ट्रीय स्तर पर रोशन कर रही हैं।
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डॉ. अंकिता राजपूत माटी ऑर्गेनाइजेशन चला रही हैं। इस संस्था के जरिए वह बिजनौर में 35 महिलाओं को रोजगार देकर सशक्त बना रही हैं। वहीं, यूपी, हरियाणा, उत्तराखंड, राजस्थान, बिहार की करीब 250 महिलाएं उनके साथ काम कर रही हैं। डॉ. अंकित बताती हैं कि बिना किसी का सहारा लिए पेबल्स आर्ट में महारथ हासिल की। इसके बाद पिछले पांच सालों से व्यावसायिक स्तर पर काम करना शुरू किया। दूसरे राज्यों में भी स्टॉल लगाती हैं। यहीं से ऑर्डर मिल रहे हैं। ऑफलाइन और ऑनलाइन दोनों तरह से ऑर्डर मिल रहे हैं।
ऐक्रेलिक रंग से होती है मूर्तियों की सजावट
पेबल्स आर्ट से तैयार मूर्तियों की सजावट ऐक्रेलिक रंग से की जाती है। इन रंग का प्रयोग बड़े स्तर पर पेंटिंग बनाने में होता है। पेबल्स आर्ट से तैयार मूर्तियों में पत्थर की कटिंग नहीं जाती है। बल्कि, आकृति के अनुसार अलग-अलग आकार के पत्थरों को जोड़कर अंतिम रूप दिया जाता है।
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आकार के हिसाब से होती है मूर्तियों की कीमत
पेबल्स आर्ट से तैयार मूर्तियों की कीमत आकार के हिसाब से अलग-अलग होती है। ए फॉर साइज की मूर्ति की कीमत 1500 रुपये हैं। इसके अलावा आकार के अनुसार मूर्ति की कीमत 10 हजार रुपये तक पहुंच जाती है। लोग अपनी पसंद के हिसाब से मूर्ति खरीद रहे हैं।
ट्रेड शो में स्टॉल लगाने के बाद मिल रहे ऑर्डर
पत्थरों से बनी मूर्ति से ऑर्डर ट्रेड शो में स्टॉल में लगाने के बाद मिलते हैं। दरअसल, ट्रेड शो में अलग-अलग जगहों के लोग आते हैं। घरों में सजावट के लिए पेबल्स आर्ट के उत्पाद की खरीदारी करते हैं। वर्तमान में उनके स्टॉल बिजनौर, झारखंड, पश्चिम बंगाल में लगा हुआ है।
अंकिता इस तरह की मूर्ति करती हैं तैयार
डॉ. अंकिता ने बताया कि पत्थरों के जरिए हर तरह की मूर्ति तैयार करते हैं। इसके लिए सही आकार के पत्थर की जरूरत होती है। इसमें किसी विशेष पत्थर का प्रयोग नहीं होता है। इन पत्थरों को जोड़कर भगवान, परिवार, महिला सशक्तिकरण, पशुओं, जीव-जंतु आदि से संबंधित मूर्तियां तैयार करती हैं।
डॉ. अंकिता का पेबल्स आर्ट का काम सराहनीय है। वह महिलाओं को भी प्रेरित कर रोजगार से जोड़ने का काम भी कर रही हैं। स्वदेशी मेला इनके और अन्य उद्यमियों के लिए कारोबार का अच्छा प्लेटफॉर्म है।
-अमित कुमार, उपायुक्त, जिला उद्योग केंद्र, बिजनौर

बिजनौर की डॉ. अंकिता राजपूत द्वारा पेबल्स आर्ट से तैयार पत्थरों की मूर्ति। संवाद- फोटो : katra news

बिजनौर की डॉ. अंकिता राजपूत द्वारा पेबल्स आर्ट से तैयार पत्थरों की मूर्ति। संवाद- फोटो : katra news

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