बिजनौर। मेडिकल अस्पताल में निजी अस्पतालों के दलालों का जाल फैला है। एंबुलेंस संचालक यहां भर्ती मरीजों को निजी अस्पतालों में भर्ती कराने के लिए बरगलाते रहते हैं। बुधवार शाम भी एक मरीज को जबरन निजी अस्पताल ले जाने की कोशिश की गई। विरोध पर स्वास्थ्यकर्मी को धमकी भी दी गई। हड्डी रोग विशेषज्ञ ने पुलिस में मामले की शिकायत की है।
मेडिकल अस्पताल के कर्मियों ने बताया कि बुधवार देर शाम एक मरीज को उसके तीमारदार पैर में चोट के कारण सहारा देकर परिसर में घुमा रहे थे। इस बीच सिराज और अंकुर अपने दो साथियों के साथ निजी अस्पताल की एंबुलेंस से अस्पताल परिसर में पहुंचे। मरीज के तीमारदारों ने बताया के चारों ने अस्पताल की स्वास्थ्य सेवाओं को बेकार बताते हुए मरीज को निजी अस्पताल में भर्ती कराने का दबाव बना। तीमारदारों ने बात नहीं मानी तो वे उन्हें धमकाने लगे। एक स्वास्थ्यकर्मी को भी धमकी दी गई। मरीज का उपचार कर रहे डॉ. अतुल ने एंबुलेंस और दोनों आरोपियों का वीडियो बना लिया। आरोपी धमकी देकर चले गए।
-शिकायत के बाद भी अस्पताल के बाहर मिली एंबुलेंस
एंबुलेंस के संबंध में शिकायत के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं हुई। बृहस्पतिवार को भी वह एंबुलेंस मेडिकल अस्पताल के बाहर खड़ी रही।
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पहले भी हुए ऐसे मामले
मेडिकल अस्पताल के हड्डी रोग विशेषज्ञ डॉ. अतुल ने बताया कि पहले भी अस्पताल में ऐसे दलालों द्वारा मरीज को ले जाने के मामले आए हैं। पुलिस को लिखित शिकायत दे दी गई है। सरकारी अस्पताल में मरीजों को बेहतर सुविधा मिलने के कारण निजी अस्पताल संचालकों द्वारा ऐसे कार्य किए जा रहे हैं।
सुरक्षाकर्मियों की है अस्पलाल में कमी : सीएमएस
मेडिकल अस्पताल के सीएमएस मनोज सैन ने बताया कि पूरे अस्पताल परिसर में छह सुरक्षाकर्मी तैनात हैं। 24 सुरक्षाकर्मियों की मांग की गई है। अस्पताल के बाहर खड़ी निजी एंबुलेंस को हटाना संभव नहीं है। मौका देखते ही ये अंदर आ जाते हैं। एसपी को पत्र लिखकर थाना स्तर से अस्पताल में सुरक्षा की मांग की गई है।
जान से मारने की धमकी भी देते हैं दलाल : डॉ. सितांशु
हड्डी रोग विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. सितांशु ने बताया कि सरकारी अस्पताल परिसर में निजी एंबुलेंस का प्रवेश वर्जित है। इसके बाद भी हर रोज ऐसे वाहन आते हैं। विरोध करने पर जान से मारने की धमकी दी जाती है।