इस दौरान 21 लोगों ने आवेदन किए, सभी को लाइसेंस निर्गत कर दिए गए लेकिन किसी ने नई खांडसारी इकाई स्थापित नहीं की। बताया कि पहले दोनों तहसीलों में कुल 120 लोगों के पास खांडसारी इकाइयों के लाइसेंस थे, जो अब बढ़कर 141 हो गए हैं। इनमें से वर्तमान पेराई सत्र में केवल 30 ही इकाइयां बमुश्किल चलीं। इनमें से भी कई घाटा बताकर बंद होने लगी हैं। विभाग का पूरा प्रयास है कि इकाइयां अधिक से अधिक चलें लेकिन लाइसेंस धारक हिम्मत दिखाने का प्रयास नहीं कर रहे हैं।
जिले में चल रहीं 92 खांडसारी इकाइयां
सहायक चीनी आयुक्त डीपी मौर्य ने बताया कि बिजनौर परिक्षेत्र में सरकार की प्रोत्साहन नीति के बाद 180 खांडसारी इकाइयों के लाइसेंस स्वीकृत हुए थे। इनमें से वर्तमान में 92 इकाई चल रही हैं। इनमें दो खांडसारी और 90 गुड़ की इकाइयां हैं। जिले में अभी कोई खांडसारी इकाई बंद नहीं हुई है।
गुड़ के दामों में भारी गिरावट बनी मुसीबत : लाइसेंस धारक
खांडसारी लाइसेंस धारक मोहम्मद अहसान, राजीव अग्रवाल, घसीटा सिंह, नरेंद्र कुमार, विजय कुमार आदि का कहना है कि सरकार की नीति बनने से ही इकाई नहीं चलती है। इकाइयों को चलाने के लिए बहुत कुछ करने की जरूरत होती है। मुख्य कारण गुड़ के दामों में भारी गिरावट है।
उन्होंने सोचा था कि जब वे महंगे दामों में 290 रुपये प्रति क्विंटल गन्ना खरीद कर गुड़ का उत्पादन करेंगे, तो गुड़ भी महंगे दामों में बिकेगा, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। गुड़ के दाम इकाइयों के बंद होने का कारण बने हैं। 2500 रुपये प्रति क्विंटल गुड़ का भाव होने से प्रति दिन 20 से 25 हजार रुपये का घाटा हो रहा है। तो ऐसे में इकाइयों को जीवित रख पाना संभव नहीं है।
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