अमर उजाला अभियान : मालन नदी के तट पर लगेंगे बांस के पौधे
बिजनौर। मालन सिर्फ अविरल और स्वच्छ ही नहीं होगी, बल्कि पर्यावरण संरक्षण में भी अहम भूमिका निभाएगी। दरअसल, मालन की खाली जमीन में बांस लगाने की तैयारी है। जिसे मालन के तेज बहाव में कटान भी नहीं होगा और जमीन भी अतिक्रमण से बची रहेगी। फिलहाल अतिक्रमण हटाकर तटबंध बनाने का सिलसिला जारी है।
एक सप्ताह से गंगा की प्रमुख सहायक नदी मालन के उद्धार के लिए अभियान चल रहा है। जिसमें मालन की जमीन से कब्जा हटाया जा रहा है। नदी की गहराई और चौड़ाई का दायरा बढ़ाया जा रहा है। जिन लोगों ने मालन की जमीन पर कब्जा कर फसल बो ली थी, उसे खाली कराया गया है। हालांकि अभी चार सौ मीटर तक ही यह काम हो पाया है। महीने भर से ज्यादा तक चलने वाले इस अभियान में मालन को अतिक्रमण मुक्त कराया जाना है।
यूं तो मनरेगा आदि से पहले भी काम होते रहे हैं, लेकिन इस बार व्यापक रूप दिया गया है। जिस तरह से नहर की पटरी बनाई जाती है, उसी प्रकार से नदी के तटों पर तटबंध के रूप में पटरी का निर्माण किया जा रहा है। दोनों ओर बनने वाली पटरी के बीच नदी को भी समतल और गहरा किया जा रहा है। इससे एक कदम और आगे की योजना प्रशासन ने तैयार की है, वो है पौधरोपण। पौधरोपण में भी बांस को तरजीह दी जाएगी। दरअसल, बांस जल्द जमीन को पकड़कर विकसित होने लगता है। साथ ही पर्यावरण का सुधार भी होगा। बता दें कि मालन की हजारों बीघा जमीन खाली रह जानी है। जिस पर फिर कब्जा न होने पाए, इस लिए पौधरोपण को जरूरी समझा जा रहा है। अतिक्रमण हटाकर इस बरसात में पौधरोपण कर दिया जाएगा।
लगातार चलेगा मालन पर अभियान : डीएम
डीएम उमेश मिश्रा ने कहा कि इस बार हमने जिले में प्रवेश स्थल से गंगा में मालन नदी के मिलने तक अभियान शुरू किया है। जब तक पूरी मालन को उसके मूल स्वरूप में नहीं लौटा दिया जाता, तब तक यह अभियान चलेगा। इसके लिए नदी के आसपास गांवों में रहने वाले लोगों को जागरूक करने के साथ ही उनका सहयोग भी लिया जाएगा।