बिजनौर। आज विश्व पर्यटन दिवस मनाया जा रहा है, ऐसे में बिजनौर के अमानगढ़ टाइगर रिजर्व की बात न हो तो यह अवसर जिले के लिए अधूरा रह जाएगा। पिछले तीन साल में ही स्थानीय से लेकर विदेशी पर्यटक तक यहां बाघ, हाथी, गुलदार और घने जंगल का दीदार करने आ चुके हैं।
इसके अलावा महाभारतकालीन महात्मा विदुर की कुटी, राजा दुष्यंत-शकुंतला की प्रणय स्थल गंगा और मालन का संगम, कण्व ऋषि आश्रम भी है। जिसे पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने का काम जोरों पर चल रहा है। बिजनौर जिला पर्यटन के लिहाज से बहुत समृद्ध है, बस जरूरत है तो इन सभी स्थलों को विकसित करने की। यहां पर रुक्मिणी मंदिर, मेनका ताल, सीता मठ जैसे पौराणिक स्थल भी हैं। अमानगढ़ जैसी प्राकृतिक संपदा के साथ-साथ चारों राष्ट्रीय धरोहर मोर, बाघ, डॉलफिन, कमल पुष्प भी हैं। ऐतिहासिक धरोहर की बात करें तो पत्थरगढ़ का किला जिसे सुल्ताना डाकू का किला भी कहा जाता है। चार मीनार, पैजनिया में क्रांति स्मारक जैसी धरोहर भी हैं।
n अमानगढ़ टाइगर रिजर्व हर साल पहुंच रहे करीब दस हजार पर्यटक : तीन साल पहले अमानगढ़ टाइगर रिजर्व को पर्यटन के लिए खोल दिया गया था। पहले साल तीन हजार के करीब पर्यटन आए। इसके अलावा इनकी संख्या बढ़ती गई। अब करीब दस हजार पर्यटक अमानगढ़ पहुंचे चुके हैं। यहां पर 32 से ज्यादा बाघ, सौ से ज्यादा हाथी, हजारों हिरण, मोर, पैंगोलिन, भालू जैसे वन्य जीव भी मौजूद हैं।
n राजा दुष्यंत-शकुंतला की प्रणय स्थली रहा है कण्व आश्रम : गंगा और मालन के मिलन स्थल के पास बने कण्व आश्रम स्थित है। यह भूमि राजा दुष्यंत और शकुंतला के प्रणय की साक्षी है। जिनके प्रणय के बाद राजा भरत का जन्म यहीं हुआ। राजा भरत के नाम पर ही देश का नाम भारत पड़ा है। कण्व आश्रम प्राचीन समय में विश्वविद्यालय हुआ करता था। हालांकि यह आश्रम उपेक्षा का शिकार है। अब प्रशासन यहां कण्व आश्रम की स्मारिका बनाने के प्रयास में लगा है।
-अमानगढ़ का मुख्य द्वार। संवाद