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शराब बिक्री पर सारा जोर, मद्यनिषेध पर ध्यान नहीं

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शराब बिक्री पर सारा जोर, मद्यनिषेध पर ध्यान नहीं
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रजनीश त्यागी
बिजनौर। जिले में शराब के जमकर जाम छलक रहे हैं। 31 मार्च को समाप्त हुए वित्तीय वर्ष तक एक साल में जिले के लोग एक हजार करोड़ रुपये की शराब पी गए। सरकार को इस साल 692 करोड़ का राजस्व मिला। यह पिछले वित्तीय वर्ष से 162 करोड़ रुपये ज्यादा है। अब लोगों को नशा छुड़ाने की मुहिम पर नजर डालें तो मद्य निषेक विभाग ने इस पर मात्र एक हजार रुपये खर्च किए।
जिले में शराब की बिक्री में हर साल बढ़ोतरी हो रही है। 31 मार्च को समाप्त हुए वित्तीय वर्ष में आबकारी विभाग ने जिले में शराब से 692 करोड़ का राजस्व कमाया। यदि शराब की कुल बिक्री की बात करें तो जिलेवासी एक साल में करीब एक हजार करोड़ की शराब पी गए। इसमें 60 प्रतिशत देशी, 20 प्रतिशत अंग्रेजी और 20 प्रतिशत बीयर शामिल हैं। अब शराब छुड़ाने के लिए हुए प्रयास पर नजर डालें तो यह बड़े मजाक से कम नहीं है। शराब पीना स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है, यह बताने की जिम्मेदारी मद्य निषेक विभाग की है। इस विभाग द्वारा जो खर्च किया जाता है, उसका भुगतान आबकारी विभाग करता है। बीते वित्त वर्ष में मद्य निषेद्य विभाग ने आबकारी विभाग को एक हजार रुपये का बिल दिया, जिसका भुगतान कर दिया गया है।
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हर साल बढ़ रही शराब पीने वालों की संख्या
जिले में हर साल शराब की खपत बढ़ रही है। आबकारी विभाग के आंकड़े इसकी गवाही दे रहे हैं। सबसे ज्यादा बढ़ोतरी बीते एक साल में हुई है। तीन साल में आबकारी विभाग के राजस्व में 172 करोड़ रुपये की बढ़ोतरी हुई है। वित्तीय वर्ष 2019-20 में आबकारी विभाग ने शराब से 520 करोड़ रुपये राजस्व जुटाया था, जो बीते वित्त वर्ष में बढ़कर 692 करोड़ रुपये तक पहुंच गया।
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सरकार से जो लक्ष्य प्राप्त होता है, उसे पूरा किया गया है। इस बार हमने करीब 90 प्रतिशत राजस्व लक्ष्य पा लिया है। वित्त वर्ष 2021-2022 में आबकारी विभाग ने 692 करोड़ राजस्व जुटाया है-जीसी वर्मा, जिला आबकारी अधिकारी
पिछले तीन वर्षों में यह रहा राजस्व
वित्त वर्ष राजस्व
2019-20 520 करोड़ रुपये
2020-21 530 करोड़ रुपये
2021-22 692 करोड़ रुपये
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