- साल 1985 में लोकसभा उपचुनाव के बाद बिजनौर में नहीं मिल सकी थी जीत
- अब चांदपुर पालिका में कांग्रेस उम्मीदवार ने खोल दिया कांग्रेस का खाता, किरतपुर में भी बेहतर प्रदर्शन
अचल चौधरी
बिजनौर। कर्नाटक चुनाव के साथ साथ बिजनौर में निकाय चुनाव भी अरसे बाद कांग्रेस के लिए कुछ खुशी के पल लेकर आया। दरअसल, जिले में 38 सालों के बाद कांग्रेस को संजीवनी मिली है। साल 1985 में लोकसभा उपचुनाव में मीरा कुमार की जीत के बाद से कांग्रेस हार का ही मुंह देखती चली आ रही थी। अब चांदपुर पालिका में अध्यक्ष पद पर कांग्रेस की उम्मीदवार विजयी हुई तो कांग्रेसियों को जीत का जश्न मनाने का मौका मिल पाया।
शनिवार को निकाय चुनाव के परिणाम सामने आए। जिसमें चांदपुर नगर पालिका सीट से कांग्रेस उम्मीदवार जीनत परवीन ने 21534 मत हासिल कर जीत दर्ज कराई है। जबकि भाजपा उम्मीदवार विकास गुप्ता रॉकी को केवल 11655 वोट ही मिल पाए। कांग्रेस उम्मीदवार जीनत परवीन ने जिले के 18 निकायों में सबसे बड़ी जीत हासिल की है। उधर किरतपुर में भी कांग्रेस उम्मीदवार मुदस्सिर जमा 6741 वोट लेकर दूसरे नंबर पर रहे। कितरपुर में बेहतर प्रदर्शन और चांदपुर की जीत ने जिले में कांग्रेस को संजीवनी दे दी है।
बता दें कि साल 1985 में बिजनौर लोकसभा सीट पर उपचुनाव हुआ था। उस वक्त कांग्रेस से मीरा कुमार, लोकदल से रामविलास पासवान और निर्दलीय के तौर पर मायावती ने चुनाव लड़ा था। इस चुनाव में मीरा कुमार ने जीत हासिल की थी। इसके बाद से कभी भी कांग्रेस का कोई उम्मीदवार लोकसभा, विधानसभा या निकाय चुनाव में जीत दर्ज नहीं कर पाया। अब 38 सालों के बाद कांग्रेस का सूखा खत्म हुआ है। हालांकि बीच में विधानसभा चुनाव के दौरान बढ़ापुर सीट पर हु़सैन अंसारी ने काफी वोट लेकर कांग्रेस को जिंदा रखने का काम किया था। (संवाद)
वर्जन::
जिले में अब कांग्रेस के बुरे दिन खत्म हो रहे है। साल 1985 मीराकुमार की जीत के बाद अब लंबे अरसे के बाद कांग्रेस को जीत मिली है - मुनीश त्यागी, जिला उपाध्यक्ष
जिले में हिन्दू सामान्य वर्ग को नहीं मिली कोई सीट
इस बार बिजनौर नगर पालिका सीट से वैश्य और पंडित भी टिकट मांग रहे थे लेकिन भाजपा ने जाट पर भरोसा जताया। उधर जिले में भाजपा ने नजीबाबाद से नकुल अग्रवाल, चांदपुर से विकास गुप्ता और धामपुर से लीना सिंघल समेत तीन वैश्यों को टिकट दिया था लेकिन इन तीनों में एक भी वैश्य जीत हासिल नहीं कर पाया है। पिछले चुनाव में भी केवल धामपुर से ही एक वैश्य राजू गुप्ता ने जीत दर्ज कराई थी। वैश्य वर्ग को ही छोड़ दें तो जिले में एक भी सामान्य वर्ग हिन्दू नहीं जीत पाया है।
नहीं चल पाया भाजपा का मुस्लिम कार्ड
भाजपा ने इस बार जिले में मुस्लिम कार्ड भी खेला। बता दें कि इस बार मंडावर, जलालाबाद, साहनपुर, सहसपुर, अफजलगढ़ से मुस्लिम उम्मीदवार को टिकट दिया था लेकिन एक भी मुस्लिम उम्मीदवार जीत दर्ज नहीं करा पाया। हालांकि मंडावर और अफजलगढ़ में भाजपा के उम्मीदवारों ने कड़ी टक्कर दी लेकिन जीत हासिल नहीं कर सके।