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माध्यमिक विद्यालयों में पांच जुलाई से शुरू होंगे दाखिले

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माध्यमिक विद्यालयों में पांच जुलाई से शुरू होंगे दाखिले
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बिजनौर। माध्यमिक विद्यालयों में पांच जुलाई से दाखिले शुरू होंगे। शिक्षक स्कूलों से ही ऑनलाइन पढ़ाएंगे। डीडीआर और डीआईओएस को निगरानी की कमान सौंपी गई है। साथ ही विद्यालय क्षेत्र के दिव्यांग बच्चों को चिह्नित करके शत प्रतिशत दाखिले कराने की जिम्मेदारी शिक्षकों की होगी। अपर मुख्य सचिव आराधना शुक्ला ने वीडियो कांफ्रेंसिंग में निर्देशों को तुरंत लागू करने की सख्त हिदायत दी है।
जिले में 387 माध्यमिक विद्यालय है। कोरोना के कारण विद्यालय बंद थे। एक जुलाई से खुल गए हैं। विद्यालयों में शिक्षक आ रहे हैं। अपर मुख्य सचिव आराधना शुक्ला ने वीडियो कांफ्रेंसिंग में विद्यालयों को आगे की गतिविधियों को लेकर दिशानिर्देश जारी किए हैं। कहा है कि कोविड-19 गाइडलाइंस का पालन करते हुए विभिन्न कक्षाओं में प्रवेश की कार्यवाही शुरू की जाए। विद्यालयों की साफ-सफाई पर जोर दिया। पौधरोपण का आवंटित लक्ष्य समय से पूरा किया जाए। डीआईओएस राजेश कुमार ने बताया कि शासन का आनलाइन पढ़ाई को प्रभावी बनाने पर जोर है। विद्यालयों को पालन सुनिश्चित करने को निर्देश भेज दिए हैं।
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ऑनलाइन पढ़ाई विद्यालयों से होगी
डीआईओएस राजेश कुमार ने बताया कि माध्यमिक विद्यालयों में शिक्षक घरों से ही आनलाइन पढ़ाई कर रहे थे। जिले के 387 विद्यालयों में करीब सवा लाख छात्र-छात्राएं पढ़ते हैं और बामुश्किल 35 प्रतिशत छात्र ही आनलाइन पढ़ाई से जुड़े हैं। शासन तक छात्रों के कम संख्या में ऑनलाइन पढ़ाई से जुड़ने का मामला पहुंचा। जिस पर शासन ने ऑनलाइन पढ़ाई को प्रभावशाली बनाने की सख्त हिदायत दी है। कहा है कि शिक्षक स्कूलों से ही ऑनलाइन पढ़ाई करेंगे। प्रधानाचार्य यह सुनिश्चित कराएंगे कि सभी छात्र व्हाट्स ऐप ग्रुप से जुड़कर पढ़ाई करें।
डीडीआर व डीआईओएस व्हाट्स ऐप ग्रुप से जुड़ेंगे
लचर सुपरविजन के चलते ऑनलाइन पढ़ाई प्रभावी नहीं हो पा रही है। छात्र भी ऑनलाइन पढ़ाई से नहीं जुड़ रहे हैं। शासन ने इस पर संज्ञान लेते हुए कहा है कि मंडलीय उप शिक्षा निदेशक अर्थात डीडीआर तथा डीआईओएस विद्यालयों के ग्रुप से जुड़े। रैंडम चेकिंग करें। पढ़ाई में कमी सामने आने पर सख्त कार्रवाई करें। छात्रों को ऑनलाइन पढ़ाई से जोड़ने के लिए शिक्षक अभिभावक संघ की वर्चुअल बैठक करें।
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शिक्षक दिव्यांग बच्चों के दाखिले कराएंगे
शासन का मानना है कि सभी दिव्यांग बच्चों के स्कूलों में शत-प्रतिशत दाखिले हों। इसकी जिम्मेदारी शिक्षकों को सौंपी गई है। शिक्षक विद्यालय क्षेत्र के दिव्यांग बच्चों को चिह्नित करेंगे तथा यह सुनिश्चित करेंगे कि सभी दिव्यांग बच्चों के दाखिले हो। कोई भी दिव्यांग बच्चा दाखिले से न छूटें। कहा है कि क्षेत्र के कक्षा आठ पास बच्चों का नौवीं में अनिवार्य रूप से दाखिला हो।
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