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समायोजन निरस्त होने से शिक्षामित्रों में उबाल

Mon, 14 Sep 2015 12:41 AM IST
ब्यूरो / अमर उजाला, बिजनौर
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बिजनौर। हाईकोर्ट से समायोजन निरस्त होने के बाद शिक्षामित्रों को जबरदस्त झटका लगा है। जिले के शिक्षामित्रों ने कोर्ट के आदेश पर असंतोष व्यक्त करते हुए 14 व 15 सितंबर को बीआरसी कार्यालयों पर विरोध प्रकट करने का निर्णय लिया है।
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रविवार को इंदिरा पार्क में आयोजित शिक्षा मित्रों की बैठक में संगठन के प्रांतीय पदाधिकारी सौरभ चौधरी एवं पुनीत चौधरी ने बताया कि शिक्षा मित्रों के हितों की लड़ाई शिक्षा मित्रों के दोनों संगठन एक साथ मिलकर लड़ेंगे। बैठक में हाईकोर्ट के आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देने का चुनौती देने का निर्णय भी लिया गया है। बैठक में जिला स्तर पर दस सदस्यीय समिति का गठन किया गया।

समिति में अहतशाम अहमद, धर्मेंद्र तोमर, सुचित मलिक, मोहम्मद बाईज अब्बासी, पोपेंद्र सिंह, जैनेंद्र सिंह, जयवीर सिंह, महिपाल सिंह, सुजीत तोमर, सत्यपाल जाटव को शामिल किया गया है। बैठक में वक्ताओं ने कहा कि शिक्षा मित्रों का समायोजन निरस्त करके उनका उत्पीड़न किया गया है। इससे उन्हें गहरा झटका लगा है। बैठक में वक्ताओं ने शिक्षा मित्रों से धैर्य रखने का आह्वान भी किया।
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बैठक की अध्यक्षता अहतशाम एवं संचालन धर्मेंद्र सिंह ने किया। इस अवसर पर नफीस, शमीम, पुष्पेंद्र सिंह, जालम सिंह, दिलावर आदि समेत भारी संख्या में शिक्षा मित्र शामिल रहे।

चार माह सेलरी भी नहीं मिली, हाईकोर्ट से बढ़ाई टेंशन
बिजनौर। परिषदीय प्राथमिक विद्यालयों में सहायक अध्यापक बनाए गए दो हजार शिक्षामित्र तो पहली सैलरी का जश्न भी नहीं मना पाए कि हाईकोर्ट के फैसले से उनकी उम्मीदों पर पानी फिर गया। शिक्षामित्र आर्थिक संकट से जूझने को मजबूर हो गए हैं। शनिवार को हाईकोर्ट ने शिक्षामित्रों के समायोजन को अवैध घोषित करने से शिक्षामित्रों को गहरा झटका लगा है।
जिले में दो हजार ऐसे शिक्षामित्र हैं जो मई के पहले सप्ताह में ही शिक्षक के पदों पर समायोजित किए गए थे। अभी तक इन शिक्षकों के वेतन के लिए उनके शैक्षिक प्रमाणपत्रों की जांच कराई जा रही थी। बीएसए कार्यालय की मानें तो करीब 80 प्रतिशत शिक्षामित्रों के शैक्षिक प्रमाणपत्रों का सत्यापन का कार्य पूरा हो चुका है। 20 अगस्त से शिक्षा मित्रों ने वेतन भुगतान के लिए बीएसए पर दबाव बनाना भी शुरू कर दिया था। बीएसए कार्यालय में वेतन भुगतान की तैयारी भी शुरू की जा रही थी।

माना जा रहा था कि सितंबर में शिक्षक के पदों पर समायोजित किए गए शिक्षा मित्रों के बैंक खातों में पहली सैलरी पहुंच जाएगी, पर शनिवार को हाईकोर्ट ने इनके समायोजन को अवैध करार देकर तगड़ा झटका दे दिया। पिछले चार महीने में शिक्षामित्रों को सैलरी नहीं मिलने से आर्थिक रूप से परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। हाईकोर्ट के फैसले से शिक्षामित्रों में मायूसी छा गई है।

दूसरी ओर उप्र प्राथमिक शिक्षामित्र संघ के प्रांतीय महामंत्री पुनीत चौधरी ने बताया कि संघ शिक्षामित्रों के हकों की लड़ाई लडे़गा। उधर, बीएसए राजेश कुमार श्रीवास्वत ने बताया कि शासन के आदेशों का पालन किया जाएगा।
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