मां की प्रेरणा से हासिल किया मुकाम
चांदपुर। मां ने बेटी को जज बनाकर अपने पति के सपनों को साकार किया है। बेटा दिल्ली से एलएलबी कर रहा है। मां बेटे को भी एलएलबी के बाद पीसीएसजे की तैयारी कराने की इच्छा मन में सजोए हुए है।
चांदपुर क्षेत्र के गांव बोहरा निवासी डॉ. राकेश कुमार गुलाब सिंह हिंदू स्नातकोत्तर महाविद्यालय चांदपुर में प्रोफेसर थे। वे गांव में खेती का काम भी देखते थे। उनके दो बेटी व एक बेटा है। बड़ी बेटी की शादी कर दी थी। डॉ.राकेश की दो अक्तूबर 2014 एक हादसे में मौत हो गई थी। उनकी इच्छा बेटी को जज बनाने की थी। उनका सपना उनकी पत्नी मधु रानी ने पूरा किया।
मां मधु रानी स्वयं भी एमए की शिक्षा ग्रहण किए हुए हैं। मां ने गृहिणी रहते हुए पूरे संघर्ष के साथ अपनी छोटी बेटी आराधना को जज बनाकर पति के सपनों को साकार किया। आराधना ने 24 साल की उम्र में ही 2018 में पीसीएसजे की परीक्षा में शामिल हुई। 2019 में घोषित हुए परीक्षा परिणाम में आराधना का चयन राजस्थान में सिविल जज जूनियर डिविजन के लिए हुआ था।
आराधना ने बताया कि वर्तमान में उसकी भरतपुर में ट्रेनिंग चल रही है। कोरोना महामारी के चलते इस समय घर भेज दिया गया है। पांच माह बाद कोर्ट मिल जाएगी। मां, बेटे को भी जज बनाना चाहती हैं। मां ने बताया कि उनका बेटा दिल्ली से एलएलबी फाइनल कर रहा है। एलएलबी पूरी होने के बाद उसे भी पीसीएसजे की तैयारी करानी है।