रफ्तार नहीं पकड़ रही एबीसी केबल डालने की योजना
बिजनौर। जिले में बिजली चोरी रोकने के लिए शुरू हुई एबीसी केबल डालने की योजना रफ्तार नहीं पकड़ रही है। इसके चलते योजना के तय समय में पूरा होने के आसार नहीं हैं।
निगम के चीफ इंजीनियर ने करीब छह माह पहले जिले में योजना का शुभारंभ किया था। 1000 से अधिक आबादी वाले गांवों में औसतन दो किलोमीटर, 2000 से अधिक आबादी वाले गांवों में औसतन चार किलोमीटर सीमा के अंदर ही एबीसी केबल डाला जाना है। अधिग्रहीत गांवों में केबल डालने का काम वित्तीय वर्ष की समाप्ति अर्थात 31 मार्च 2020 तक पूरा होना है।
एसई सीपी सिंह का कहना है कि प्रथम चरण के गांवों में समय से काम पूरा कराने के प्रयास हैं। शासन की मंशा है कि बिजली चोरी पर लगाम लगे। इसके लिए मुंबई, दिल्ली जैसे बडे़ शहरों की तर्ज पर गांवों में एबीसी केबल डालने की योजना शुरू की गई है। चीफ इंजीनियर ने जिले के बिजनौर, धामपुर सर्किल के सभी आठ डीवीजन के जेई से लेकर एक्सईएन की बैठक में कहा था की एबीसी केबल डलने के बाद लाइन लास कम होगा और विद्युत राजस्व बढे़गा। उनका तर्क था कि राजस्व बढ़ने के बाद एनटीपीसी या निजी क्षेत्र से खरीदी जाने वाली बिजली का समय से भुगतान होगा। जिले को भरपूर बिजली मिलेगी। योजना में प्रथम चरण में जिले के 1100 गांवों को लिया गया था। एसई के अनुसार केबल डालने का कांट्रेक्ट एक निजी कंपनी को दिया गया है, अभी तक करीब 77 गांवों में केबल डाला गया है।
इसके लिए पहले गांव का तय मानकों के अनुसार सर्वे होता है, उसके बाद केबल डाला जाता है। शासन के निर्देश हैं कि एक गांव का काम पूरा होने के बाद ही अगले गांव में काम शुरू किया जाए। केबल डालने का काम बेहद धीमी गति से चल रहा है। इसलिए काम समाप्ति के लिए बचे करीब छह माह में एक हजार से अधिक गांवों में एबीसी केबल बिछाने का काम पूरा होने के आसार कम ही दिखाई पड़ रहे हैं। जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में करीब चार लाख कनेक्शन हैं। योजना में अधिग्रहीत गांव में भी कनेक्शन लाखों में हैं। निगम को ग्रामीण क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर बिजली चोरी की शिकायत मिलती रहती हैं। इसका खामियाजा निगम को राजस्व नुकसान के रूप में भुगतना पड़ता है।