वाटर होल में पानी देख पहुंचा हाथियों का झुंड
कालागढ़। वन विभाग की ओर से वनों में वाटर होल में पानी भरे जाने की कवायद शुरू हो गई है। वनों में पानी के पहुंचते ही हाथियों ने जलक्रीड़ा के साथ अपनी प्यास को शांत किया।
तापमान बढ़ते ही वनों में वन्यजीवों को रोकने के लिए वाटरहोल में पानी भरा जा रहा है, ताकि आबादी क्षेत्रों में वन्यजीवों को जाने से रोका जा सकें। वनों में झाड़ियां सूख रही हैं। वनों में पानी की समस्या होने पर हाथी, बाघ, बारहसिंगा, नीलगाय, चीतल आदि पानी की तलाश में वनों से लगे आबादी क्षेत्र में आ जाते हैं। कालागढ़ की नई कॉलोनी एवं सूखासोत से लगा हुआ जनपद बिजनौर का सीमावर्ती ग्रामीण क्षेत्र वन्यजीवों के विचरण का इलाका बन जाता है। मानव वन्यजीव संघर्ष के साथ-साथ वन्यजीवों की सुरक्षा एवं नागरिकों को भी खतरा पैदा हो जाता है। वन क्षेत्राधिकारी ने बताया कि सवेरे में हाथियों का एक दल पानी पीने के लिए वाटरहोल पर पहुंचा। पानी में काफी देर तक हाथी क्रीड़ा करते रहे। इस दौरान गश्ती दल उन पर निगाह बनाए रहे।
वनों में दस वाटर होल
टाइगर रिजर्व के कालागढ़ के वन क्षेत्राधिकारी आरके भट्ट ने बताया कि वनों में 10 वाटर होल संचालित हैं। कुछ वाटर होल जंगल के प्राकृतिक स्रोतों से जल लेते हैं। दुर्गम क्षेत्रों में कुछ वाटर होल विभाग ने वन्यजीवों के लिए बनाए हैं। कृत्रिम वाटरहोल में पानी की उपलब्धता बनाए रखने के लिए उन में नियमित पानी भरा जा रहा है।