बिजनौर। नगर की आधी से ज्यादा आबादी पानी नहीं बल्कि स्लो प्वाइजन पी रही हैं। नगर में कई जगहों पर पानी की टीडीएस (टोटल डिजोल्व सोलिडस) 700 को पार कर गई है। खास बात ये है कि नगर में 150 फिट गहराई तक पानी प्रदूषित हो चुका है। नगर के सरकारी हैंडपंप भी प्रदूषित पानी उगल रहे हैं।
नगर में करीब 20 हजार परिवार हैं। पालिका में 11 हजार कनेक्शन हैं, जिनमें से आठ हजार घरेलू हैं। जल निगम की रिपोर्ट के अनुसार पुराने सरकारी हैंडपंप के पानी के नमूनों में भी कमी पाई गई है। भूगर्भ जल लगातार प्रदूषित हो रहा है। 150 फिट गहराई तक जिले भर में पानी प्रदूषित हो गया है। एक निजी एक्वागार्ड कंपनी के आंकड़ों के मुताबिक नवाब के अहाते में पानी की टीडीएस 750 पर पहुंच गई है। ज्ञान विहार कालोनी व चक्कर रोड क्षेत्र के जल स्रोतों में टीडीएस 500 से 650 के बीच है। आवास विकास कालोनी की बात करें तो यहां पर पानी की टीडीएस 350 से 400 के करीब है। नगर में करीब 15 प्रतिशत व्यक्ति निजी हैंडपंप के पानी का इस्तेमाल कर रहे हैं। करीब 10 प्रतिशत व्यक्तियों के यहां सबमर्सिबल हैं। कम गहराई के हैंडपंप, टंकी व सबमर्सिबल का पानी पूरी तरह से प्रदूषित है। उधर, विसलरी वाटर की टीडीएस 50 रहती है। सामान्य स्वच्छ जल में 100 टीडीएस होनी चाहिए, लेकिन नगर के हालात जुदा हैं।