बिजनौर। विद्युत निगम से नाता तोड़ने के बाद भी हजारों लोग निगम के बकाएदार हैं। यह बकाया सुरसा की तरह लगातार बढ़ रहा है। उपभोक्ता बिल जमा कर रहे हैं, लेकिन रिकार्ड में वे फिर भी बकाएदार हैं। विद्युत निगम ने जिले के हजारों उपभोक्ताओं को करीब 70 करोड़ रुपये का फर्जी बकाएदार बना डाला। जिले में 48 हजार विद्युत उपभोक्ताओं पर 150 करोड़ रुपये से भी अधिक का बकाया बताया जा रहा है, जबकि असल में बकाया केवल 80 करोड़ रुपया है। खास बात ये है कि पिछले काफी समय से विद्युत निगम आला अफसरों को भी बकाएदारों की रिपोर्ट फर्जी ही भेज रहा है। शिकायतों पर जांच हुई तो निगम के कर्मचारियों की कारगुजारी सामने आई।
केस नंबर एक
चमड़ौला निवासी किसान गिरवर सिंह पुत्र टेकचंद्र ने नलकूप का मार्च 2013 तक का समस्त बकाया बिल जमा कर दिया था, लेकिन निगम ने इन पर एक लाख रुपया बकाया निकाल दिया। गिरवर सिंह ने निगम से कई बार शिकायत की, लेकिन अभी तक भी समाधान नहीं हुआ है।
केस नंबर दो
हरचंदपुर निवासी जसराम पुत्र घसीटा सिंह का भी कुछ इसी तरह का मामला है। इन्होंने बिल जमा किया, लेकिन विद्युत निगम ने रिकार्ड को दुरुस्त नहीं किया और लगातार बकाया बढ़ाकर ही इनके पास बिल भेज रहा। इनके मामले की जांच भी अभी पेंडिंग है। इसी गांव के किसान शीशराम सिंह भी विद्युत निगम की इस कारगुजारी से परेशान हैं।
केस नंबर तीन
चमड़ौला के किसान मांगेराम पुत्र शौनाथ सिंह का तो मामला ही अजीब है। इनके पास एक नलकूप है, लेकिन विद्युत निगम के रिकार्ड में इनके नाम पर दो नलकूप चल रहे हैं और बकाया भी दोगुना रफ्तार से ही बढ़ रहा है। ये भी अर्जी लिए विद्युत निगम के चक्कर लगा रहे हैं, लेकिन नतीजा शून्य है।
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एसई विद्युत राजकुमार का कहना है कि कनेक्शन कटने के बाद भी बिल भेजने और बिल जमा करने के बाद भी बकाया बढ़ने के संबंध में शिकायतें मिल रही हैं। जिन मामलों में निगम की ओर से लापरवाही हुई, उन्हें सही किया जा रहा है।
इन बातों का रखें ध्यान
बिल जमा करने के बाद रसीद सुरक्षित रखें।
कनेक्शन के स्थायी विच्छेदन की रसीद भी निगम से अवश्य लें।
खुद ही काउंटर पर जाकर या आनलाइन बिल जमा करें।
अपरिचित को बिल का पैसा न दें।
बिल में गड़बड़ी होने पर निगम से तुरंत उसकी शिकायत करें।