बिजनौर। परिषदीय प्राइमरी और उच्च प्राइमरी स्कूलों के शिक्षकों को निर्वाचन के कार्य के लिए अब पदाभिहीत के रूप में तैनात कर स्कूलों के शिक्षण कार्य गड़बड़ा गया है। जबकि शिक्षक गैर शैक्षणिक कार्यों की ड्यूटियों का लगातार विरोध कर रहे हैं।
जुलाई से शुरू हुए नए शिक्षा सत्र में प्राइमरी और उच्च प्राइमरी के शिक्षकों और शिक्षा मित्रों का पीछा गैर शैक्षणिक कार्यों से नहीं छूट रहा है। जुलाई में ही काफी संख्या में शिक्षकों को बीएलओ बना दिया गया। इसके बाद शिक्षकों से 15 दिन तक परिवार सर्वेक्षण कराया गया। अब अल्पसंख्यक छात्रों के खाते बैंकों में खुलवाने के लिए शिक्षक इधर उधर भटक रहे हैं। सितंबर के अंतिम सप्ताह में काफी संख्या में शिक्षकों और शिक्षा मित्रों को बीएलओ के सहयोग के लिए प्रत्येक बूथ पर एक पदाभिहीत अधिकारी तैनात किया गया है। तहसील स्तर पर 30 सितंबर को ऐसे शिक्षकों और शिक्षा मित्रों का एक दिवसीय प्रशिक्षण भी होना है। इसके अलावा काफी संख्या में ऐसे शिक्षक भी हैं जो समायोजन में इधर से उधर होने पर शिक्षण कार्यों में पूरी तरह से जुट नहीं पा रहे हैं। शिक्षा सत्र 2012-13 का एक पखवाड़ा खत्म होने के बाद शिक्षकों का पीछा इन ड्यूटियों से नहीं छूट रहा है। उत्तर प्रदेश प्राथमिक शिक्षक संघ के जिलाध्यक्ष नागेश कुमार, मंत्री प्रशांत चौधरी ने बताया कि गैर शैक्षणिक कार्याें में ड्यूटी लगाना गलत है। इस पर रोक लगनी चाहिए। उधर, आदर्श विशिष्ट बीटीसी एसोसिएशन के अध्यक्ष सुहेल अख्तर बेग, पंकज कुमार , राहुल सिंह तथा वरिष्ठ शिक्षक नेता हरवंत सिंह ने बताया कि आए दिन नई-नई ड्यूटी लगने से स्कूलों में शिक्षा का माहौल नहीं बन रहा है। शिक्षकों को इन ड्यूटियों से तुरंत अलग किया जाए।