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‘तप और त्याग का पर्व है दशलक्षण’

Wed, 26 Sep 2012 12:00 PM IST
Bijnor
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नजीबाबाद। दशलक्षण पर्व तप व त्याग का पर्व है। सत्य और अहिंसा के मार्ग पर चलकर व्यक्ति अपने जीवन को सार्थक बनाता है। श्री दिगंबर जैन मंदिर में प्रवचन के दौरान यह बात अजय जैन ने कही।
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श्री दिगंबर जैन पंचायती मंदिर में धर्म सभा में अजय जैन कहा कि आत्मा के निखार के लिए तप का बहुत महत्वपूर्ण योगदान है। मनुष्य को जीवन में अनुशासन, मर्यादा, संयम का पालन करना चाहिए। उत्तम तप पर चर्चा में कहा कि यह पर्व सुगंध दशमी के रूप में मनाया जाता है। महिलाओं द्वारा वृत रखा जाता है। दशलक्षण पर्व के धार्मिक कार्यक्रम के दौरान जैन मंदिरों में धूप खेई गई। श्री दिगंबर जैन पंचायती एवं सरजायती मंदिरों में जैन श्रद्धालुओं ने सामूहिक पूजा में भाग लेकर धर्म लाभ उठाया।
धार्मिक कार्यक्रमों में पारसनाथ जैन, जिनेश्वर प्रसाद जैन, अजय जैन, विनोद जैन, जितेंद्र जैन, मनीष जैन, साधना जैन, सुनीता जैन, सुषमा जैन, ज्ञानचंद जैन आदि ने अलग-अलग वेदियों पर श्री दशलक्षण पर्व की पूजा की। पंडित ब्रजेश जैन ने धूप दशमी की कथा सुनाई।
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बिना संयम मानव जीवन बेकार : एलाचार्य
बिजनौर, 25 सितंबर। दशलक्षण पर्व के अवसर पर छठे लक्षण उत्तम संयम के विषय में एलाचार्य 108 निशंक भूषण महाराज ने कहा कि जिस प्रकार बिना ब्रेक के गाड़ी बेकार है, उससे कभी भी दुर्घटना हो सकती है। उसी प्रकार बिना संयम का मानव जीवन बेकार है।
सोमवार की रात्रि महावीर बाल विद्या मंदिर में भक्ताभर पाठ के उपरांत उन्होंने कहा कि पांचों इंद्रियों से संबंधित विषयों के भोग छोड़ने से ही संयम होता है और संयम से ही हमारा शरीर पवित्रता को प्राप्त होता है। विषयों के सुख को सुख नहीं कहा जा सकता है, वह तो सुख का आभास मात्र होता है। वास्तविक सुख तो विषय भोगों पर संयम से होता है। उधर जैन मंदिर में डॉ. रमेश चंद जैन ने कहा कि अपनी इंद्रियों को विषय भोगोें से हटाकर आत्म सम्मुख करना संयमन संयम कहलाता है। संयम शरीर के लिए नहीं बल्कि आत्म हित हेतु होना चाहिए।
जैन समाज के अध्यक्ष इंजीनियर ब्रिजेश कुमार जैन, मंत्री सुशील कुमार जैन, अरंजय जैन, सुरेश जैन, डॉ. अशोक कुमार जैन, प्रदीप कुमार जैन, अशोक कुमार जैन, पवन जैन, अनीता जैन, राजबाला जैन, आरके जैन, कमलेश जैन, क्षमा जैन, संजय जैन आदि उपस्थित रहे। मंगलवार की सुबह जैन मंदिर में भगवान शांति नाथ विधान के उपरांत धूप दशमी के अवसर पर मजाराज श्री के सानिध्य में सामूहिक रुप से धूप खेई गई।
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