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इस्मा ने सर्वे कराने से किए हाथ खड़े

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बिजनौर। गन्ना सर्वे से चीनी मिलों के हाथ खड़े कर देने के बाद अब गन्ना सहकारी समिति कर्मचारी सर्वे कराएंगे। शासन ने भी इस संबंध में आदेश जारी कर दिए हैं। सर्वे के आधार पर किसानों की गन्ना पर्ची निर्धारित की जाएंगी।
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सीजन की शुरूआत के मुकाबले इस समय चीनी के दाम बहुत कम चल रहे हैं। चीनी के अधिक उत्पादन से चीनी के मूल्य में गिरावट आई है। इससे शुगर मिल भी घाटे हैं। जिले की शुगर मिलें भी इस साल मई तक चली हैं। मिलों को हो रहे घाटे को देखते हुए शुगर मिल मालिकों ने चीनी मिल चलाने से इंकार कर दिया था। शासन को भेजे पत्र में इस्मा (इंडियन शुगर मिल एसोसिएशन) ने गन्ना सर्वे करने से भी मना कर दिया था। इससे किसानों में भी हड़कंप मचा हुआ था। अगले सत्र के लिए गन्ना सर्वे कराने से छह मई से होना था। मगर, शुगर मिलें देर तक चलने तथा इस्मा के इंकार से सर्वे शुरू नहीं हुआ। इसे देखते हुए अब शासन ने गन्ना समिति कर्मचारियों से ही गन्ने के रकबे का सर्वे कराने का निर्णय लिया है। इस संबंध में गन्ना विभाग को आदेश भी दे दिए गए हैं।
सर्वे से यह पता चलता है कि गन्ना रकबा कितना है। किसी किसान की कितनी जमीन में पौधा और कितने में पैड़ी है। ट्रैंच विधि से बोए खेतों की भी जानकारी मिलती है। शरदकालीन गन्ना ट्रैंच विधि से बोने वाले किसानों को पौधे के लिए गन्ना पर्ची अब सीजन की शुरूआत में ही दी जा रही हैं। सर्वे के आधार पर ही पौधे और पैड़ी की गन्ना पर्ची निर्धारित की जाती है। जिला गन्ना अधिकारी यशपाल सिंह के अनुसार समिति कर्मचारियों की ड्यूटी सर्वे में लगा दी गई है। सर्वे का कार्य जल्द से जल्द पूरा करने का निर्देश भी दिया गया है।
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