फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

कलक्ट्रेट में बनेगा फिकल स्लज ट्रीटमेंट प्लांट

विज्ञापन
विज्ञापन
बिजनौर। कलक्ट्रेट में फीकल स्लज ट्रीटमेंट प्लांट बनाया जाएगा। पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर प्रशासन ने कलक्ट्रेट का चयन किया है। विभाग के सभी कार्यालयों के शौचालयों को एक बड़े सीवर टैंक से जोड़ा जाएगा। ट्रीटमेंट प्लांट से यहां आने वाली गंदगी को निस्तारित कर खाद बनाया जाएगा व पानी को साफ कर दूसरे प्रयोगों में लाया जाएगा। भूगर्भ जल को प्रदूषित होने से बचाने व जलस्तर बनाए रखने के लिए यह पहल की जा रही है।
विज्ञापन

शौचालय के सीवर टैंक अब दस फुट से भी ज्यादा गहरे बनाए जाने लगे हैं। इस सीवर का पानी जमीन के अंदर जाकर भूगर्भ जल को प्रदूषित करने लगता है। अगर सीवर टैंक दस फीट से कम गहरे बनाए जाएं तो सूरज की किरणेें उसमें पैदा होने वाले हानिकारक बैक्टिरिया और अन्य पदार्थों को नष्ट कर देती हैं। लेकिन सीवर टैंक नीचे गहरे होने से ऐसा संभव नहीं हो रहा है। शहरों में सीवर ट्रीटमेंट प्लांट बनाए जा रहे हैं, लेकिन शहरों के बाहर विकसित होने वाली कॉलोनियों पर ध्यान नहीं दिया जाता है।
राष्ट्रीय स्वच्छता मिशन के अंतर्गत इस पर ध्यान दिया जा रहा है। नगर पालिकाओं व पंचायतों से सीवर ट्रीटमेंट प्लांट बनाने के लिए कहा जा रहा है। जहां यह संभव नहीं वहां पर फीकल स्लज ट्रीटमेंट प्लांट बनाने के निर्देश दिए गए हैं। क्षेत्रीय प्रदूषण बोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारी जीसी वर्मा के अनुसार शहर के बाहर बस रही कॉलोनियों में भी फीकल स्लज ट्रीटमेंट प्लांट बनाने के लिए निर्देश जारी किए जा रहे हैं। इस प्लांट के पायलट प्रोजेक्ट के लिए कलक्ट्रेट का चयन किया गया है। यहां पर नगर पालिका यह प्लांट बनाएगी। कलक्ट्रेट में आने जाने वाले अधिकारी व जनता इस ट्रीटमेंट प्लांट की कार्यविधि देखकर उपयोगिता समझेगी।
विज्ञापन


ऐसे काम करता है फीकल सेफ्टेज मैनेजमेंट प्लांट
फिकल सेफ्टेज मैनेजमेंट प्लांट के लिए एक हजार वर्ग फीट जगह पर्याप्त होती है। यह मोहल्लों में ही अंडरग्राउंड बनाया जाता है। सीवर से गंदगी निकालकर प्लांट के चैंबर में डाली जाती है और पेड़ों की पत्तियां डाली जाती हैं। 21 से 25 दिन के अंदर यह खाद में बदल जाती है। इस पूरी प्रक्रिया में बिल्कुल दुर्गंध नहीं आती है। पानी को भी एक खास संयंत्र से साफ किया जाता है। बंगलूरू शहर में इस फीकल स्लज ट्रीटमेंट प्लांट से साफ हुए पानी से एक झील बनाई गई है। यह झील एक पिकनिक स्पॉट के रूप में मशहूर हो चुकी है।

इस प्रक्रिया से भूगर्भ जल रहेगा स्वच्छ
भूगर्भ जल की पहली स्टेटा 50 से 60 फीट तक रहती है। कहीं पर भी पहली स्टेटा का पानी पीने लायक नहीं रह गया है। दूसरी स्टेटा 120 फीट तक रहती है। यहां से पानी निकाला जाता है। पहली स्टेटा का पानी ही दूसरी परत के पानी को जमीन में छनकर रिचार्ज करता है। अगर पहले स्टेटा के पानी को साफ नहीं रखा गया तो दूसरी परत का पानी भी प्रदूषित होना शुरू हो जाएगा। ईओ दुर्गेश त्रिपाठी के अनुसार कलक्ट्रेट का चयन फीकल स्लज ट्रीटमेंट का चयन हो गया है। जल्दी इस पर काम शुरू होने की उम्मीद है।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें