वोटरों ने समझा नोटा का महत्व
बिजनौर। इस बार निकाय चुनाव कई मायनों में महत्वपूर्ण रहा है। मतदाताओं ने नोटा का महत्व समझा। जिले के करीब 1000 मतदाताओं ने नोटा पर मुहर लगाई। चांदपुर के मतदाताओं ने सबसे अधिक नोटा को पसंद किया। शहरी पंचायतों के चुनाव में नोटा का इस्तेमाल लोकतंत्र की मजबूती के लिए अच्छा संकेत माना जा रहा है।
पूर्व चुनाव आयुक्त टीएन शेषन ने चुनाव सुधारों की प्रक्रिया शुरू की थी। चुनाव में किसी भी प्रत्याशी से संतुष्ट नहीं होने उसे नकार देने जैसे यक्ष प्रश्न चुनाव आयोग के समक्ष आए। इस पर नोटा की शुरुआत हुई। सबसे पहले ईवीएम में लोकसभा, विधानसभा चुनावों में नोटा को लाया गया। चुनाव आयोग ने नोटा का महत्व समझाने के लिए प्रचार प्रसार किया। नतीजतन इसका सकारात्मक नतीजे सामने आए। निकाय चुनाव में लोगों ने नोटा का इस्तेमाल किया। चांदपुर के मतदाताओं ने नोटा का सबसे अधिक इस्तेमाल किया है। चांदपुर नगरपालिका में नोटा का इस्तेमाल करने वाले 303, बिजनौर नगरपालिका में 166 मतदाता रहे। हल्दौर में 37, नहटौर में छह, शेरकोट में 47, अफजलगढ में 43, धामपुर में 27, स्योहारा में 72, नहटोर में 72, नूरपुर में 16 नजीबाबाद में 46, नगीना में 44, झालू में एक, मंडावर में 11, साहनपुर में 23, सहसपुर में शून्य जलालाबाद में 30, बढ़ापुर में 32 मतदाताओं ने सभी प्रत्याशियों को नकारते हुए नोटा पर मुहर लगाई।
जिले में मतदाताओं की संख्या को देखते हुए भले ही नोटा का इस्तेमाल करने वाले वोटरों की संख्या कम हो परंतु इतना तो साफ है कि मतदाताओं में नोटा के इस्तेमाल के प्रति जागरूकता जरूर बढ़ रही है। समाज सेवी पुरुषोत्तम शर्मा, आरके सिंह रिटायर्ड विद्युत अधिकारी, कैलाश चंद शर्मा आदि का कहना है कि मतदाताओं और क्षेत्र के विकास की उपेक्षा करने वाले नेताओं को सबक सिखाने के लिए नोटा का इस्तेमाल लोकतंत्र का एक सशक्त माध्यम है।