नजीबाबाद। नगर में मुशायरे का आयोजन कर मुशायरों को वक्त की जरूरत बताया गया।
होटल इंद्रलोक में अदब नवाज हबीबुल्ला और मास्टर मंजूर की याद में आयोजित मिनी मुशायरे का आगाज अब्दुल वाजिद की हम्द और सरफराज साबरी की नात ए पाक से हुआ। मौसूफ वासिफ ने तुम अपने पांव तले रौंद डालिए उसको, हमारे मुल्क में सर को उठा रहा है कोई..., महेंद्र अश्क ने जिंदा रावण रहे घूमते, सिर्फ पुतला जलाया गया, पहले शहरों की गिनती हुई, फिर निशाना लगाया गया..., कारी वाजिद ने अंधेरा यूं मिटाया जा रहा है, मेरे घर को जलाया जा रहा है... कलाम पेश कर समां बांधा।
महेंद्र अश्क की अध्यक्षता में आयोजित मुशायरे में कारी शाकिर रिजवी ने जरूरतमंद था कुछ दे दिया होता खजाने से, खुदा के नाम पर देकर खजाने कम नहीं होते... कलाम से झकझोरा। मुशायरे में सनव्वर अली, अकरम जलालाबादी, डॉ.इल्यास अंसारी, शेर हुसैन उर्फी, डॉ.आफताब नोमानी, मुख्तार शाद ने भी कलाम से भावविभोर किया। मुख्य अतिथि दिल्ली स्टेट ऑल इंडिया मोमिन कांफ्रेंस के अध्यक्ष इमरान अंसारी ने कहा कि शायर समाज को एक सूत्र में पिरोने में अहम किरदार निभाते हैं। अनवार अंसारी, मो.इकबाल, मो.आकिब आदि मौजूद रहे।