बिजनौर। सूबे के जिला अस्पताल अब मेडिकल कॉलेज के रूप में विकसित होंगे। वहां विद्यार्थियों को चिकित्सा क्षेत्र के शॉर्ट टर्म कोस कराकर वहीं नियुक्त किया जाएगा। सीएचसी, पीएचसी आदि पर भी इनको नियुक्ति दी जाएगी। इसके लिए खाका खिंचना शुरू हो गया है।
स्वास्थ्य विभाग चिकित्सकों से खाली होता जा रहा है। चिकित्सकों की विभाग में भारी कमी है। जिले में चिकित्सकों के कुल 196 पद हैं, लेकिन जिले में केवल 82 चिकित्सक ही तैनात हैं। जिले की 36 लाख से अधिक आबादी इन चिकित्सकों के ही हवाले है। जिला अस्पताल में कोई सर्जन तक नहीं है। हाल यह है कि अगर किसी का छोटा मोटा आपरेशन भी करना हो तो उसे पहले जिला अस्पताल और बाद में जिला अस्पताल से मेरठ रेफर कर दिया जाता है। स्वास्थ्य केंद्र रेफर सेंटर बनकर रह गए हैं। चिकित्सकों की भारी कमी को देखते हुए अब जिला अस्पतालों को मेडिकल कॉलेज के रूप में विकसित करने की पहल की जा रही है। यहां युवाओं को शॉर्ट टर्म कोर्स कराए जाएंगे। चिकित्सकों की मौजूदगी में ये कोर्स होंगे। कोर्स पूरा होने पर इन चिकित्सकों को स्वास्थ्य विभाग में ही नियुक्ति दी जाएगी। जिला अस्पताल में पद पूरे होने पर इन्हें अन्य केंद्रों पर भेजा जाएगा। ये चिकित्सक एमबीबीएस कोर्स वाले नहीं होंगे। चिकित्सकों की पूर्ति होने पर सरकारी अस्पतालों में इलाज के लिए आने वाले मरीजों के बिना दवा लिए नहीं लौटना होगा। खास बात यह है कि जिला अस्पतालों को मेडिकल कॉलेज का रूप ही दिया जाएगा। अगर कहीं मेडिकल कॉलेज बनाने का प्रस्ताव पहले से पारित है तो वहां मेडिकल कॉलेज भी बनेगा। इससे बिजनौर में गांव स्वाहेड़ी के पास बनने वाले मेडिकल कॉलेज में कोई दिक्कत नहीं आएगी।
जिले के सीएचसी व पीएचसी केंद्रों पर चिकित्सकों का टोटा है। रात को इन केंद्रों पर ताले लटक जाते हैं। यहां से कई बार तो मरीज को सिर्फ इसलिए रेफर कर दिया जाता है, क्योंकि चिकित्सक की ड्यूटी का समय खत्म होने वाला होता है। ज्वाइंट डायरेक्टर मुरादाबाद स्वास्थ्य विभाग डा.एसपी अग्रवाल के अनुसार जिला अस्पताल को मेडिकल कॉलेज के रूप में विकसित करने की योजना का खाका तैयार किया जा रहा है। विभाग में मानव संसाधन बढ़ाना शासन का प्रथम लक्ष्य है। चिकित्सकों की कमी नहीं होगी तो जनता को लाभ होगा।