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ट्रैंच विधि से शरदाकालीन गन्ना बोने वालों पर मेहरबानी

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शरदकालीन गन्ना बोने वालों को मिलेगी प्राथमिकता
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बिजनौर। ट्रैंच विधि से शरदकालीन गन्ना बोने वाले किसानों को गन्ना विभाग व मिल प्राथमिकता देंगे। इन किसानों के खेत में खड़े पौधे की पर्ची पैड़ी की पर्ची के साथ ही जारी होगी। किसान गन्ने का पौधा जल्दी काटकर फिर से उसमें सहफसली खेती कर सकेेंगे।
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आमतौर पर गन्ना फरवरी में बोया जाता है, लेकिन ट्रैंच विधि से शरदकालीन गन्ना बोकर उत्पादन बढ़ाने में जिले के किसान मॉडल बन चुके हैं। गन्ना विभाग की इस पहल को किसानों ने बहुत तेजी से अपनाया है। शरदकालीन फसल में गन्ना अगस्त से सितंबर तक बोया जाता है। साल 2015 में जिले में करीब एक हजार हेक्टेअर जमीन में शरदकालीन गन्ना बोया गया था। किसान गन्ना बोते समय इसमें अन्य फसलों की भी खेती कर अतिरिक्त लाभ कमाया जाता है। अब तक शरदकालीन गन्ने की अगस्त से सितंबर तक बोई गई फसल करीब डेढ़ साल बाद फरवरी-मार्च में कटती थी। मिल पौधे की खरीद के लिए पर्ची फरवरी के बाद ही जारी करती हैं, लेकिन अब गन्ना बोने के एक ही साल बाद अक्तूबर में ही इन किसानों को पर्ची दी जाएगी। मिल भी अक्तूबर में चलाने की तैयारी है। इन खेतों के खाली होने पर किसान गेहूं सहित अन्य फसलों की खेती कर सकेंगे। डीसीओ ओपी सिंह के अनुसार, शरदकालीन गन्ने की पर्ची पेड़ी के साथ ही दिलाई जाएंगी।
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