कालागढ़ में कालागढ़ में एनजीटी के निर्देश पर दो दिनों में रामगंगा बांध क्षेत्र में 80 आवासीय/अनावासीय भवनों को ध्वस्त कर दिया गया। प्रशासन ने केंद्रीय कॉलोनी में रामगंगा मार्केट की 55 में से 16 दुकानें, क्लब, व्यायामशाला और मेस के साथ अभियंता छात्रावास को ध्वस्त कर दिया। एसडीएम आरके तिवारी ने बताया कि ध्वस्तीकरण के बाद वन विभाग को ध्वस्त आवासों/भवनों की भूमि और अलग से खाली तीन हेक्टेयर भूमि सौंप दी गई है। 27 जून को रिपोर्ट उच्च अधिकारियों को सौंप दी जाएगी। कार्रवाई के दौरान लैंसडान के एसडीएम, एएसपी हरीश वर्मा, रामगंगा बांध परियोजना के ईई शेर सिंह, एई एमके लखवाड़, किशोर कुमार वन विभाग के कार्बेट टाइगर रिजर्व के पार्क वार्डन शिवराज चंद, रेंजर आरके भट्ट और देहरादून के अधिकारी भी मौजूद रहे।
तीन दिन से बिजली-पानी को तरसे लोग
कालागढ़ में रामगंगा बांध परियोजना की नई कालोनी व केंद्रीय कालोनी में प्रशासन ने दूसरे दिन भी ध्वस्तीकरण का अभियान जारी रहा। भारी पुलिस व पीएसी की मौजूदगी में केंद्रीय कॉलोनी के रामगंगा मार्केट और नई कॉलोनी में ध्वस्तीकरण अभियान चला। वहीं प्रशासन ने अभियान के एक दिन पहले से ही क्षेत्र की बिजली काट दी है। तीन दिन से बिजली आपूर्ति नहीं होने से पेयजल संकट गहरा गया। लोग सुबह होते ही पानी भरने के लिए बर्तन लेकर ट्यूबवेल की ओर दौड़ पड़ते हैं।
ध्वस्तीकरण के दौरान केंद्रीय कॉलोनी की बिजली और पानी की आपूर्ति बंद कर दी गई। बिजली पानी के अभाव में जनता में हाहाकार मच गया। विद्युत निगम के ईई रघुराज सिंह का कहना है प्रशासन के आदेशों पर बिजली बंद की गई है, वहां से आदेश आने पर ही बिजली बहाल हो सकेगी। बिजली के अभाव में संत रविदास मंदिर, वाल्मीकि ब्रह्मालय, संजय नगर की मस्जिद से प्रतिदिन होने वाली प्रार्थना नहीं हो सकी। लोगों का कहना है कि आपूर्ति बाधित होने से पेयजल संकट गहरा गया है। सुबह-शाम पानी के लिए ट्यूबवेल पर लाइन लगनी शुरू हो जाती है। लोगों ने कहा कि आपूर्ति शीघ्र सुचारु नहीं किया तो पानी के लिए स्थिति और खराब हो जाएगी।
करोड़ों के भवन ध्वस्त
एनजीटी के आदेशों पर की गई कार्रवाई में परियोजना की करोड़ों रुपये की इमारतें जमींदोज हो गईं। इनका निर्माण 1960 से 1970 के बीच हुआ था। जिसे उत्तर प्रदेश के सिंचाई विभाग के कुशल कारीगरों और अभियंताओं ने डिजाइन कर बनाया था। परियोजना के ईई शेर सिंह का कहना है कि कालागढ़ बांध पर कॉलोनियां इंजीनियरिंग का एक बेमिसाल नमूना हैं।
ध्वस्तीकरण के बाद पलायन जारी
कालागढ़ में ध्वस्तीकरण की कार्रवाई के बाद अब भी जनता के पलायन का सिलसिला जारी है। नई कॉलोनी, केंद्रीय कॉलोनी से काफी परिवार पलायन कर गए हैं। जिस पर कांग्रेसियों ने रोष जताया है।
पूर्व राज्यमंत्री जसवीर राणा ने बताया कि कालागढ़ मे हुई ध्वस्तीकरण की कार्रवाई में पहले जनता का वहां से विस्थापन किया जाना था। उन्होंने आरोप लगाया कि सूबे में भाजपा सरकार को जनता की परेशानियों से कोई सरोकार नहीं है। सरकार के प्रतिनिधि ऐसी घड़ी में भी जनता के बीच नहीं पहुंचे हैं। कांग्रेसियों ने मांग की है कि कालागढ़ में निवास कर रही जनता को मूलभूत सुविधाएं प्रदान की जाएं।
27 जून को सौंप दी जाएगी रिपोर्ट
अधिकारियों के मुताबिक 27 जून को रिपोर्ट उच्च अधिकारियों को सौंप दी जाएगी। अगला चरण भी यहां चलाया जाएगा। 20 सितंबर तक पूरी तरह से उत्तरी क्षेत्र को खाली कर वन विभाग को सौंपा जाना है। ऐसे ही आदेश न्यायालय के हैं। कार्रवाई के दौरान लैंसडान के एसडीएम, एएसपी हरीश वर्मा, रामगंगा बांध परियोजना के ईई शेर सिंह, एई एमके लखवाड़, किशोर कुमार वन विभाग के कार्बेट टाइगर रिजर्व के पार्क वार्डन शिवराज चंद, रेंजर आरके भट्ट और देहरादून, पौड़ी, हरिद्वार के सीओ, पीएसी/आईआरबी, फायर ब्रिगेड और पुलिस बल मौजूद रहे।