घोषणा के बाद भी नहीं बना नगीना जिला
नगीना। उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य द्वारा बड़े जिलों को छोटा करके नए जिले बनाने की सहमति के बाद नगीना जिला बनाए जाने की आशा क्षेत्र के लोगों में जगी थी। लेकिन तीन महीने से अधिक समय बीत जाने के बावजूद शासन द्वारा कोई कार्रवाई न किए जाने से मामला ठंडे बस्ते में है।
11 नवंबर 2018 को नगर की जनहित सेवा समिति के अध्यक्ष शेख इरशाद अहमद ने प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्य नाथ को संबोधित एक ज्ञापन एसडीएम गजेंद्र कुमार को सौंपकर नगीना को जिला बनाए जाने की मांग की थी। इससे पूर्व नगर के गणमान्य नागरिक, काष्ठ कला उद्यमियों द्वारा भी प्रदेश के मुख्यमंत्री, राज्यपाल से भी मांग की गई। नगीना लोकसभा सीट घोषित किए जाने पर क्षेत्रवासियों को यह उम्मीद थी कि अब नगीना को शीघ्र ही जिला घोषित किया जाएगा। तहसील कार्यालय के सूत्रों के मुताबिक शासन द्वारा इस मामले में कार्रवाई शुरू की गई और शासन को जिलाधिकारी के माध्यम से एक रिपोर्ट भी प्रेषित की गई। रिपोर्ट में जिले का मानचित्र, नगीना काष्ठ कला की 15 यूनिट, नगीना कताई मिल की खाली पड़ी भूमि समेत अनेक स्थानों की भी जानकारी दी थी। क्षेत्र के सपा विधायक मनोज पारस ने विधानसभा में इस मांग को उठाया। लेकिन कार्यवाही आगे नहीं बढ़ सकी। विश्व दलित परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष भूपेंद्र पाल ने बताया की इस मांग को पूरा कराने के लिए एक बार फिर क्षेत्रवासियों को एकजुट होकर आंदोलन करना होगा। वहीं जनहित सेवा समिति के अध्यक्ष शेख इरशाद अहमद का कहना है कि वे नगीना को जिला बनाए जाने के लिए संघर्ष करने के लिए तैयार हैं। इस मामले में एसडीएम गजेंद्र कुमार का कहना है कि मामला उनके संज्ञान में नहीं है।