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कम होगा हस्तिनापुर वाइल्ड लाइप सेंचुरी का एरिया

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कम होगा हस्तिनापुर वाइल्ड लाइफ सेंक्चुरी का एरिया
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बिजनौर। हस्तिनापुर वाइल्ड लाइफ सेंक्चुरी का क्षेत्रफल कम हो सकता है। उद्योगपतियों की मांग पर केंद्र सरकार द्वारा किए गए सर्वे में सेंक्चुरी के क्षेत्रफल को अव्यवहारिक पाया गया है। इसे कम करने के लिए केंद्र सरकार से संस्तुति की गई है। अगर सेंक्चुरी एरिया कम होता है तो यहां पर उद्योगों की स्थापना को गति मिलेगी। केंद्र सरकार की इस कार्रवाई से तीन जिले बिजनौर, जेपीनगर व मेरठ प्रभावित होंगे।
हस्तिनापुर वाइल्ड लाइफ सेंक्चुरी 2073 वर्ग किलोमीटर एरिया में है। यह तीन जिलों मेरठ, जेपीनगर व बिजनौर में है। वाइल्ड लाइफ क्षेत्र जंगली जानवरों की सुरक्षा के लिए घोषित किया जाता है। वन विभाग के सूत्रों के अनुसार इस क्षेत्र में खेती, निवास, निर्माण आदि नहीं हो सकता है। कोई भी ऐसा काम नहीं हो सकता है जिससे जंगली जानवरों का जीवन प्रभावित हो। लेकिन वाइल्ड लाइफ सेंक्चुरी का करीब 90 फीसदी हिस्सा खेती, निवास, निर्माण आदि से आच्छादित है। यहां तक कि इसमें कई बिजलीघर भी बने हैं। सेंक्चुरी एरिया में उद्योगों की स्थापना पर रोक है। काफी समय से तीनों जिलों के उद्यमी सेंक्चुरी एरिया का फिर से मूल्यांकन कराने की मांग कर रहे थे। केंद्र सरकार ने उद्यमियों की इस मांग पर इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ वाइल्ड लाइफ से इसका सर्वे कराया था। सर्वे की मांग उठाने वाले चांदपुर निवासी व्यापारी पंकज वैश्य के अनुसार सर्वे करने वाली फर्म ने भी माना है कि सेंक्चुरी में शामिल किया गया क्षेत्र अव्यवहारिक है। यहां पर इंसानों का दखल बहुत ज्यादा है। जंगल कहीं कहीं पर हैं। पंकज वैश्य के अनुसार सर्वे करने वाली फर्म ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि सेंक्चुरी एरिया को कम किया जाना चाहिए। जहां वन हैं वही एरिया सेंक्चुरी में शामिल किया जाए। बाकी एरिया को मुक्त रखा जाए। पंकज वैश्य के अनुसार डीएम अटल कुमार राय ने इस संबंध में जल्दी निर्णय होने का आश्वासन दिया है।
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कलक्ट्रेट ही नहीं डीएम आवास भी है सेंक्चुरी एरिया में
बिजनौर की कलक्ट्रेट, यहां तक की डीएम आवास भी सेंक्चुरी एरिया में शामिल है। कई बिजलीघर, कॉलोनी, नेशनल हाइवे भी इस एरिया में हैं। ऐसे में शहरी क्षेत्र को सेंक्चुरी एरिया घोषित करने का औचित्य नहीं है। कुछ दिनों पहले बाबा रामदेव ने नजीबाबाद क्षेत्र में गोशाला खोलने के लिए करीब दस हजार बीघा जमीन मांगी थी, लेकिन सेंक्चुरी एरिया का हवाला देते हुए यह प्रस्ताव शासन को भेज दिया गया था। अगर यह गोशाला खुल जाए तो क्षेत्र के हजारों बेरोजगारों को यहां काम मिलेगा और बेरोजगारी खत्म होगी। सेंक्चुरी एरिया के कम होने से बिजनौर, मेरठ व जेपीनगर में उद्योगों की स्थापना के लिए नए दरवाजे खुलेंगे।
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