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खांडसारी उद्योग को बढ़ावा देकर चीनी मिलों का दबाव होगा कम

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गुड़ उद्योग को बढ़ावा देने की कवायद शुरू
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बिजनौर। चीनी उद्योग पर पड़ रहे दबाव को अब गुड़ उद्योग कम करेगा। चीनी उद्योग पर पड़ा रहा गन्ने का दबाव कम करने के लिए अब खांडसारी उद्योग को बढ़ावा दिया जाएगा। जिले में बंद पड़े क्रेशर और कोल्हुओं को फिर से चलाने की तैयारी की जा रही है। इनके चलने से हर साल कई लाख क्विंटल गन्ना चीनी मिलों में जाने से बचेगा। इसके लिए गन्ना विभाग ने तैयारी शुरू कर दी है।
गुड़ बनाने वाले क्रेशर और कोल्हू शुरू से ही किसानों के खेवनहार रहे हैं। किसान नगदी की जरूरत को पूरा करने के लिए कोल्हुओं व क्रेशरों पर नगद में गन्ना बेचते रहे हैं। कोल्हुओं, क्रेशरों पर गन्ने के दाम गुड़ के दामों पर निर्भर करते हैं। अगर बाजार में गुड़ का दाम अच्छा है तो यहां पर किसानों को गन्ना मूल्य चीनी मिल से भी ज्यादा मिल जाता है। पहले जिले में बहुत कोल्हू व क्रेशर संचालित होते थे। इससे चीनी मिलों पर गन्ने की पेराई का दबाव नहीं रहता था। मगर, धीरे धीरे कोल्हू व क्रेशरों की संख्या कम होती चली गई। इसका मिलों के संचालन पर विपरीत असर पड़ा है। चीनी मिलों पर गन्ने का दबाव कम करने के लिए अब सरकार बंद पड़े कोल्हू व क्रेशरों को चलाने करने की तैयारी में है। जिले में 130 क्रेशर के लाइसेंस हैं। इनमें से 79 क्रेशर बंद पड़े हैं। इसके अलावा करीब 1200 कोल्हुओं में से करीब 700 ही चलते हैं। हाल ये है कि जिला मुख्यालय के पास गिनती के भी क्रेशर व कोल्हू नहीं हैं। इन सभी को फिर से चलाने की तैयारी की जा रही है। कोल्हुओं के साथ क्रेशरों को भी सरकार ने टैक्स फ्री किया है।
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ऐसे कम होगा दबाव
एक क्रेशर एक सीजन में एक लाख क्विंटल गन्ने की पेराई आराम से कर सकता है। इसके अलावा कोल्हू पर एक दिन में 100 क्विंटल तक गन्ना पेरा जा सकता है। कोल्हू एक सीजन में दस हजार क्विंटल तक गन्ना पेराई कर सकता है। अगर सभी कोल्हू व क्रेशर पूरी क्षमता से चलें तो सीजन में ये डेढ़ करोड़ क्विंटल गन्ना तक खरीद सकते हैं। जबकि वर्तमान में इससे आधे से भी कम गन्ना इनके द्वारा खरीदा जाता है। इससे चीनी मिलों पर दबाव बहुत कम होगा।

गुड़ के दाम पर निर्भरता
गुड़ के दाम कभी कभी चीनी से भी ज्यादा हो जाते हैं। गुरू तो गुड़ ही रहे चेले शक्कर हो गए कहावत को गुड़ उद्योग झूठा साबित कर देता है। वर्तमान में भी गुड़ के दाम तीन हजार रुपये प्रति क्विंटल तक चल रहे हैं।
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सात नए क्रेेशर के आवेदन आए
बीते पेराई सत्र में रिकवरी करीब 13 प्रतिशत तक रही थी। यानि गन्ने से करीब 13 किलोग्राम चीनी बनी। क्रेशर में भी इतनी ही चीनी या गुड़ बनाया जा सकता है। इस बार क्रेशरों के संचालन को टैक्स फ्री किया गया है। सात नए क्रेशर लगाने के लिए आवेदन भी आ गए हैं।
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