मलयेशिया की तर्ज पर साफ होगा बिजनौर शहर
बिजनौर। बिजनौर नगर पालिका क्षेत्र मलयेशिया के शहरों की तर्ज पर चमकेगा। क्लीन गंगा अभियान के तहत मलयेशिया के शहरों की तर्ज पर सिटी सैनिटेशन प्लान बनाया जा रहा है। इसके लिए नगर पालिका के किसी अधिकारी या कर्मचारी को भी मलयेशिया के शहर के निरीक्षण के लिए भेजा जा सकता है।
बिजनौर नगर पालिका क्लीन गंगा अभियान में शामिल है। गंगा किनारे बसी नगर पालिकाओं को इसमें शामिल किया गया है। गंगा के अलावा इसके किनारे बसी नगर पालिकाओं व पंचायतों को साफ कराना भी केंद्र व राज्य सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है। इस अभियान के अंतर्गत नगर पालिका में विशेष सफाई अभियान चलाए जाने हैं। मलयेशिया को दुनिया के सबसे साफ शहरों में गिना जाता है। बिजनौर नगर पालिका को भी मलयेशिया के शहरों की तर्ज पर ही स्वच्छ बनाने की कवायद की जाएगी। मलयेशिया में कूड़े को निस्तारित कर खाद बनाया जाता है। गंदे पानी को ट्रीट कर उसका उपयोग सिंचाई में होता है। पेड़ों के पत्तों तक को इकट्ठा कर उनसे खाद बनाया जाता है। गलने व न गलने वाले कूड़े के लिए अलग-अलग कूड़ेदान रखे जाते हैं। उत्तर भारत में भी नगर पालिकाओं को मलयेशिया के शहरों की तर्ज पर स्वच्छ किया जा रहा है। बैंगलुरू में तो ट्र्ीट किए हुए पानी से कई किलोमीटर लंबी झील बनाई गई है। बिजनौर में गंदे पानी को साफ करने के लिए सीवर के ट्रीटमेंट प्लांट का निर्माण इस योजना में पहले ही किया जा रहा है।
यह है समस्या
बिजनौर नगर पालिका में कूड़ा निस्तारण आज भी सबसे बड़ी समस्या है। पालिका में हर रोज करीब 25 टन कूड़ा निकलता है। निस्तारण के लिए जमीन न होने पर यह कूड़ा अक्सर सड़क किनारे ही ठिकाने लगाया जाता है। हालांकि कूड़ा निस्तारण के लिए अब जमीन की तलाश तेजी से की जा रही है।
पॉलिथीन भी परेशानी
स्वच्छता अभियान में पॉलिथीन भी सबसे बड़ी समस्या रही है। अक्सर नागरिक पॉलिथीन में कूड़ा भरकर नालियों में फेंक देते हैं। पॉलिथीन नाली में अड़कर पानी का बहाव रोक देती है। इससे बदबूदार पानी सड़क पर फैलता है और गंदे पानी में मच्छरों का प्रकोप भी बढ़ता है।
बनेगा स्लज ट्रीटमेंट प्लांट
शहर में तो सीवर लाइन बिछ चुकी है, लेकिन कलक्ट्रेट में सीवर लाइन नहीं बिछी। यहां पर फिकल स्लज ट्रीटमेंट प्लांट लगाया जा रहा है। यहां पर सीवर की गंदगी को खाद बनाया जाएगा। यह प्रोजेक्ट पूरे जिले के लिए मॉडल बनेगा।