छह सदस्यों ने की गद्दारी : उदयन वीरा
बिजनौर। जिला पंचायत अध्यक्ष के पूर्व अध्यक्ष उदयन वीरा का कहना है कि छह सदस्यों की गद्दारी और प्रशासन के रवैये के कारण उन्होंने इस्तीफा दिया है। रात 11 बजे तक वे चुनाव जीत रहे थे। लेकिन छह गद्दार पता नहीं किस लालच में उनका साथ छोड़कर चले गए। प्रशासन उनके खिलाफ झूठे मुकदमे दर्ज करा रहा था। उनका स्वास्थ्य भी ठीक नहीं है। अब थोड़ा आराम करेंगे और अध्यक्ष पद का चुनाव फिर जीतेंगे।
अपने कैंप कार्यालय में आयोजित प्रेस कांफ्रेंस में उन्होंने कहा कि उनके साथ अब भी काफी सदस्य हैं। सब अपनी मर्जी से उनके साथ हैं। उन्होंने सभी सदस्यों को मान सम्मान दिया। कहा कि प्रशासन के रवैये की वजह से किसान जसवंत सिंह की मौत का मामला तूल पकड़ा। किसान की मौत घर पर हुई और मुकदमे उनके खिलाफ दर्ज हुए। उन्होंने कहा कि ऐसे चुनाव में सब सुरक्षा के लिए प्रशासन के भरोसे रहते हैं। 31 जुलाई को भी दूसरे खेमे के लोगों ने उनसे अभद्रता की थी। कहा कि तबीयत खराब होने के कारण वे अभी मैदान में नहीं थे। थोड़ा आराम करके फिर मैदान में आएंगे और फिर से अध्यक्ष बनेंगे।
वक्त आने पर पता चल जाएगा कि अध्यक्ष की कुर्सी किसे मिलेगी। उदयन वीरा की पत्नी पूर्व विधायक रुचि वीरा ने कहा कि प्रशासन उनके समर्थक जिला पंचायत सदस्यों को डरा, धमकाकर मानसिक दबाव बना रहा था। एसओ, इंस्पेक्टर सदस्यों के घरों पर दबिश दे रहे थे। धारा सिंह के अपहरण के मामले में उन्होंने कहा कि धारा सिंह खुद उनके घर पर आया था। पुलिस ने सीसीटीवी की फुटेज देखने के बाद यह बात मान भी ली है। धारा सिंह के शरीर पर चोट के निशान मिलने के सवाल पर उन्होंने कहा कि धारा सिंह के लोगों ने ही वे निशान बनाए होंगे। उन्होंने कहा कि जिले के नेताओं में उदयन वीरा, रुचि वीरा से निपटने का दम नहीं था, इसलिए केंद्र के आदमी बुलाए गए। उन पर दबाव बनाने के लिए दो दिन में उनकी गिरफ्तारी कराने की मांग की गई।
रुचि वीरा ने कहा कि किसान जसवंत सिंह की मौत का उन्हें भी दुख है, लेकिन घर पर मरे व्यक्ति की मौत के मामले में उनके खिलाफ गैर इरादतन हत्या की रिपोर्ट दर्ज कर ली गई। उन्होंने जसवंत सिंह को कभी देखा भी नहीं। खुद डीएम ने भी जसवंत सिंह की मौत घर में होने का बयान दिया है, तो वे जसवंत सिंह की मौत की जिम्मेदार कैसे हो गईं। कहा कि थाने में तोड़फोड़ करने और हाईवे पर जाम लगाने वालों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई है। सपा द्वारा इस मामले में उनके पक्ष में खुलकर न आने पर उन्होंने कहा कि पार्टी उनकी साथ है। वे शांतिप्रिय हैं और नहीं चाहतीं कि सड़कों पर जाम लगने से जनता परेशान हो। भाजपा नेताओं द्वारा उनको समर्थन दिए जाने के सवाल पर उन्होंने कहा कि उनका किसी से बैर नहीं है। सभी के साथ उनका व्यवहार ठीक है। प्रेस वार्ता में सपा जिलाध्यक्ष अनिल यादव, खुशनूद खां आदि मौजूद रहे।
फजीहत से बचने को उदयन वीरा ने दिया इस्तीफा : साकेंद्र चौधरी
बिजनौर। अविश्वास प्रस्ताव लाने वाले विरोधी खेमे के नेता साकेंद्र चौधरी ने प्रेस वार्ता में कहा कि उदयन वीरा ने फजीहत से बचने के लिए अध्यक्ष पद की कुर्सी से इस्तीफा दिया है। उन्होंने कहा कि उदयन वीरा के खिलाफ 45 सदस्य साथ थे और सात अन्य सदस्य भी उनके साथ आने को तैयार थे। उन्होंने कहा कि वे सपा में थे, लेकिन पार्टी ने उनको तीन साल पहले निष्कासित कर दिया था। उन्होंने भाजपा की ऑनलाइन सदस्यता ले रखी है। वे भाजपा के सक्रिय कार्यकर्ता हैं और भाजपा के लिए काम कर रहे हैं। अध्यक्ष पद के चुनाव में उन्हें भाजपा ने प्रत्याशी बनाया तो वे चुनाव जरूर लड़ेंगे। एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि चाहे जो परिस्थिति हो वे चुनाव लड़ेंगे। जनता का उन्हें भरपूर साथ मिला है। उन्होंने कहा कि उदयन वीरा को जिला पंचायत अध्यक्ष पद की कुर्सी से हटवाकर उन्होंने पंचायत सदस्यों, जनता को सम्मान दिलाया है।
पैदल ही कलक्ट्रेट पहुंचे सदस्य
बिजनौर। जिला पंचायत अध्यक्ष पर अविश्वास प्रस्ताव पर मतदान के दौरान कड़ी सुरक्षा व्यवस्था रही। विकास भवन से लेकर प्रदर्शनी मैदान तक किसी आम नागरिक को फटकने तक नहीं दिया गया। इस दौरान कई जगह पर बैरियर भी बनाए गए थे। जिला पंचायत सदस्यों की बस को भी पुलिस लाइन चौकी के पास ही रोक लिया गया। वहां से सदस्य पैदल ही कलक्ट्रेट पहुंचे।
अफसर लेते रहे सुरक्षा का जायजा
बिजनौर। कलक्ट्रेट में सुरक्षा व्यवस्था पर अफसर खुद नजर रखे रहे। डीएम जगतराज, एसपी अतुल शर्मा, सीडीओ डॉ. इंद्रमणि त्रिपाठी, एसपी देहात दिनेश सिंह, एसडीएम सत्येंद्र सिंह सुरक्षा व्यवस्था का जायजा लेते रहे। उन्होंने पुलिसकर्मियों से मुस्तैद रहने को कहा। अविश्वास प्रस्ताव पर कार्रवाई के दौरान विकास भवन से लेकर प्रदर्शनी चौक तक किसी को भी कलक्ट्रेट के अंदर नहीं आने दिया गया। इस दौरान इस क्षेत्र में रहने वाले नागरिकों को परेशानी उठानी पड़ी। वे दूसरे रास्तों से अपने घरों को गए।