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ट्रैंच गन्ने की बुआई के लिए मिलों ने खोला खजाना

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बिजनौर। किसानों को ट्रैंच विधि से शरदकालीन गन्ना बोने को प्रेरित करने के लिए शुगर मिलों ने भी अपना खजाना खोला है। शुगर मिल किसानों को खाद फ्री देने से लेकर अन्य सामान भी अनुदान पर दे रही हैं। बिजनौर व चांदपुर शुगर मिल तो बिना ब्याज के 30 हजार रुपये तक किसानों को दे रही हैं। मिलों का उद्देश्य अधिक से अधिक शरदकालीन गन्ना लगवाने का है। इसके लिए गन्ना विभाग व शुगर मिलें गांवों में गोष्ठी भी कर रही हैं।
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ट्रैंच विधि से गन्ना बोने में जिले के किसानों ने प्रदेश के सभी जिलों को पीछे छोड़ दिया है। किसान ट्रैंच विधि से गन्ना बोकर बंपर फसल पैदा कर रहे हैं। अगस्त से अक्तूबर तक बोए जाने वाले शरदकालीन गन्ने में बीमारी न आने के कारण इसकी पैदावार बहुत अच्छी होती है। जिले में इस बार दस हजार हेक्टेयर से अधिक शरदकालीन गन्ना बोने का लक्ष्य रखा गया है। किसानों को शरदकालीन गन्ना बोने के लिए प्रेरित करने को शुगर मिलों ने भी अपना खजाना खोला है। बिजनौर व चांदपुर शुगर मिल किसानों को प्रति हेक्टेयर गन्ने की बुवाई पर 120 क्विंटल प्रेस मड फ्री दे रही हैं। इसके अलावा किसानों को बिना ब्याज के 30 हजार रुपये तक व ट्रैंच ओपनर खरीदने पर तीन हजार रुपये तक का अनुदान दिया जा रहा है। स्योहारा शुगर मिल किसानों को प्रति एकड़ बुवाई पर 50 क्विंटल तक जैविक खाद फ्री व बुवाई के लिए 600 रुपये प्रति एकड़ का अनुदान दे रही है।
धामपुर शुगर मिल प्रति हेक्टेयर बुवाई पर 125 क्विंटल प्रेस मड फ्री व जैविक खाद बनाने की दवा फ्री दे रही है। भूमि के उपचार के लिए दवाइयां भी फ्री दे रही हैं। जो किसान गन्ना बोने के लिए मिल से बीज खरीदेगा, मिल उसके खेत पर गन्ने का बीज पहुंचाएगा। बीज के ट्रांसपोर्ट का खर्च किसानों से नहीं लिया जाएगा।
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डीसीओ ओपी सिंह के अनुसार शरदकालीन गन्ने में रोग नहीं आता। इसमें किसान कई फसल जैसे आलू, गाजर, मूली, गोभी, मटर आदि की खेती भी करके अतिरिक्त कमाई करते हैं। शरदाकालीन गन्ना बोने के लिए शुगर मिल भी किसानों को प्रेरित कर रही हैं।
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