अब गेहूं की फसल नहीं रहेगी मजबूरी की खेती
बिजनौर। किसानों के लिए गेहूं की फसल केवल मजबूरी की खेती नहीं रहेगी। गेहूं की फसल भी बंपर पैदावार देगी। नगीना में कृषि अनुसंधान केंद्र के फार्म हाउस में नई प्रजाति राज 4120 की पैदावार की जा रही है। अगले साल यह बीज किसानों को बेचा जाएगा। इस बीज के गेहूं का उत्पादन लगभग दुगुना होगा। इससे किसान की आमदनी बढ़ेगी।
जिले में गन्ने के बाद गेहूं सबसे ज्यादा रकबे में बोई जाने वाली फसल है। जिले में करीब डेढ़ लाख हेक्टेयर जमीन में गेहूं की खेती की जाती है। इतने अधिक रकबे में बोए जाने के बाद भी किसान गेहूं की फसल को मजबूरी का सौदा ही मानते हैं। किसान गेहूं की फसल को केवल मजबूरी में ही बोते हैं। गेहूं की फसल की पैदावार बहुत कम होती है। गन्ने, धान, फल, सब्जी आदि की तो उन्नत प्रजाति आने लगी हैं, गेहूं की फसल पर अब तक कोई ध्यान नहीं दिया गया था, लेकिन अब गेहूं की फसल की उन्नत प्रजाति किसानों के बीच लाने की पूरी तैयारी की जा रही है। गेहूं शोध निदेशालय करनाल द्वारा गेहूं की प्रजाति राज 4120 का बीज किसानों को देने की तैयारी की जा रही है। यह प्रजाति देर से बोने पर भी एक बीघा जमीन में पांच क्विंटल की पैदावार आसानी से देती है। इस बीज को किसानों के बीच ले जाने के लिए बड़ी संख्या में इसकी पैदावार करनी होगी। इसके लिए राज 4120 प्रजाति का बीज नगीना स्थित कृषि अनुसंधान केंद्र में भेजा गया है। यहां पर 15 एकड़ जमीन में राज 4120 प्रजाति का बीज बोया गया है। गेहूं मिलने के बाद अगले साल यह बीज पूरे वेस्ट यूपी में किसानों को दिया जाएगा।
हुई कटाई गई कमाई
गेहूं की फसल में सबसे ज्यादा खर्च व कम आमदनी है। प्रति बीघा गेहूं के बीज से लेकर खाद, जुताई, कटाई आदि में किसान का बहुत पैसा चला जाता है। गेहूं की फसल में किसान को केवल एक हजार रुपये प्रति बीघा तक ही बचता है। गेहूं की कटाई व गहाई में फसल का करीब 25 प्रतिशत हिस्सा मजदूर के यहां ही चला जाता है।
32 क्विंटल प्रति हेक्टेयर है औसत उत्पादन
आमतौर पर एक बीघा में चार क्विंटल तक गेहूं निकल जाता है, लेकिन जिले में गेहूं की फसल की औसत पैदावार 32 क्विंटल प्रति हेक्टेयर है। यानि एक बीघा जमीन में ढाई क्विंटल तक ही पैदावार गेहूं की फसल की होती है। अगर राज 4120 प्रजाति का बीज बोया जाए तो इसकी पैदावार 50 से 60 क्विंटल प्रति हेक्टेयर होती है। नगीना के फार्म में तैयार बीज अगले साल हजारों बीघा जमीन में बोया जा सकेगा।
रेतीली जमीन की मुख्य फसल है गेहूं
जिले में डेढ़ लाख हेक्टेयर जमीन में गेहूं की फसल होती है। जिले में रेतीली जमीन विशेषकर चांदपुर, गंज, चंदक क्षेत्र में गेहूं की फसल मुख्य फसल है। यहां गन्ने की फसल इतनी अच्छी नहीं होती है। यहां के किसान गेहूं की फसल बोने को मजबूर हैं। अगर इन क्षेत्र के किसान उन्नत प्रजाति का बीज बोएंगे तो उनकी आमदनी बढ़ेगी।
राजस्थान में तैयार हुआ राज 4120
गेहूं की सबसे ज्यादा विकसित प्रजाति राजस्थान में तैयार की जाती हैं। राजस्थान में कम नमी में भी होने वाली प्रजाति के बीज विकसित किए जाते हैं। राजस्थान में तैयार हर प्रजाति के नाम के आगे कोड नाम राज जरूर लिखा जाता है।
नगीना स्थित कृषि अनुसंधान केंद्र के प्रभारी डा.डीएन मिश्रा के अनुसार फार्म हाउस में राज 4120 प्रजाति का गेहूं बो दिया गया है। यह जमना शुरू हो गया है। यह प्रजाति किसानों को मिलने से उत्पादन बढ़ेगा और किसानों को फायदा होगा।