बिजनौर। निकाय चुनाव में भाजपा व सपा में बगावत शुरू हो गई है। सपा व भाजपा के टिकट न मिलने से नाराज दावेदारों ने बगावत का बिगुल फूंक दिया है। इन नेताओं ने निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में पर्चे दाखिल कर दिए हैं। निर्दलियों ने पार्टी प्रत्याशियों के सामने मुसीबत खड़ी कर दी है।
नगर पंचायत झालू से संजीव राणा भाजपा का टिकट मांग रहे थे। 2012 के चुनाव में उनकी पत्नी कविता चौधरी मात्र 800 वोटों से चुनाव हारी थीं, तभी से वे अगला चुनाव लड़ने की तैयारी में थे। संजीव राणा को विश्वास था कि भाजपा उन्हें टिकट देगी। पर भाजपा ने ऐन वक्त पर टिकट नरेंद्र सिंह को दे दिया। संजीव राणा ने मतदाताओं का मन टटोलकर चुनाव मैदान में उतरने का एलान किया। सोमवार को उन्होंने दल बल के साथ बिजनौर पहुंचकर निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में अपना पर्चा दाखिल कर दिया। संजीव राणा के चुनाव मैदान में उतरने से भाजपा प्रत्याशी नरेंद्र सिंह के समीकरण गड़बड़ा गए हैं। धामपुर नगर पालिका से रवि कुमार व अंकुर अग्रवाल भाजपा का टिकट मांग रहे थे। भाजपा ने वहां से राजू गुप्ता को टिकट दे दिया। राजू गुप्ता के टिकट को लेकर भाजपा में खेमेबंदी शुरू हो गई। टिकट न मिलने से नाराज रवि कुमार व अंकुर अग्रवाल ने निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में चुनाव मैदान में उतरने का निर्णय लिया। सोमवार को दोनों ने निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में अपना नामांकन पत्र दाखिल कर दिया। इसे लेकर भाजपा प्रत्याशी राजू गुप्ता के खेमे में खलबली मची हुई है। धामपुर नगर पालिका से सपा ने पूर्व चेयरमैन महमूद हसन कस्सार का टिकट काटकर अब्दुल कलाम को दे दिया। सपा में इस टिकट को लेकर रार खड़ी हो गई। महमूद कस्सार का खेमा इस बात से नाराज है। आरोप लगाया कि पूर्व मंत्री मूलचंद चौहान के कहने पर अब्दुल कलाम को टिकट दिया गया है। महमूद हसन कस्सार ने अपने समर्थकों की राय लेकर चुनाव मैदान में उतरने का फैसला किया। सोमवार को उन्होंने धामपुर नगर पालिका से निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में अपना पर्चा दाखिल कर दिया और चुनाव मैदान में कूद गए।