बिजनौर। जिले की चीनी मिल क्षमता से कम पेराई कर रही हैं। इन चीनी मिलों पर अब शासन ने नजरें टेढ़ी कर ली हैं। इन चीनी मिलों का पिछले पांच सालों का रिकॉर्ड खंगाला जा रहा है। जो चीनी मिल लगातार कम पेराई कर रही हैं, उनके लाइसेंस में परिवर्तन किया जाएगा।
चीनी मिलों को गन्ना आवंटन पेराई क्षमता के आधार पर होता है। जिस मिल की पेराई क्षमता जितनी अधिक होगी, उतना ज्यादा उसे रकबा आवंटित किया जाएगा। चीनी मिलों को पेराई क्षमता से 92 प्रतिशत तक पेराई करना अनिवार्य होता है। लेकिन चीनी मिल क्षमता से कम ही पेराई कर रही हैं। इससे किसानों को समय से गन्ना पर्ची नहीं मिल पा रही हैं। साथ ही पेराई क्षमता पर कार्य न करने से चीनी मिलों को भी आर्थिक क्षति उठानी पड़ रही है। जिले में 92 प्रतिशत से कम पेराई करने वाली चीनी मिलों को नोटिस भी जारी किए गए, लेकिन उन पर कोई असर नहीं हुआ। इस पर अब शासन इन चीनी मिलों द्वारा पांच साल में प्रतिदिन के हिसाब से की गई पेराई का रिकॉर्ड खंगाल रहा है। अगर जांच में पांच साल की पेराई क्षमता लगातार कम पाई जाती है तो इन चीनी मिलों के रकबे पर कैंची चल सकती है। इनका रकबा दूसरी चीनी मिलों को दिया जाएगा।
जिले में कम पेराई वाली चीनी मिल
चीनी मिल पेराई क्षमता 2014-15 2015-16 2016-17 2017-18 2018-19
धामपुर 140000 74.43 6.76 76.91 79.48 81.44
स्योहारा 130000 74.75 75 76.34 78.01 71.25
बिलाई 90000 82.90 77.88 76.29 80.68 79.14
बहादरपुर 75000 78.20 75.84 76.81 79.92 80.39
बरकातपुर 70000 71.06 83.67 83.73 87.57 94.36
बुंदकी 65000 81.23 82.42 80.80 91.49 91.06
चांदपुर 45000 68.27 73 76 66.11 76.27
बिजनौर 35000 45.46 56.91 57.09 62.23 62.14
नजीबाबाद 30000 93.17 90.70 87.23 89.77 89.47
योग 680000 75.26 77.07 77.16 8.07 80.34
नोट: ये आंकड़े गन्ना विभाग से लिए गए है। पेराई क्षमता क्विंटल प्रतिदिन में है। सालों के आंकड़े प्रतिशत में हैं।
रकबे पर चलेगी कैंची
जिला गन्ना अधिकारी यशपाल सिंह के अनुसार गन्ना कम पेरने वाली चीनी मिलों की पूरी जानकारी शासन को भेजी जा रही है। कम पेराई करने वाली चीनी मिलों के रकबे पर कैंची चलेगी।