‘समाज की सोच बदलेगी तभी अपराजिता होगी नारी’
नूरपुर। अमर उजाला फाउंडेशन द्वारा चलाए जा रहे अपराजिता कार्यक्रम के तहत गुरु तेग बहादुर सीनियर सेकेंडरी पब्लिक स्कूल में नारी सशक्तिकरण विषय पर पोस्टर प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। प्रतियोगिता में छात्राओं ने नारी की गरिमा को दर्शाते हुए सुंदर पोस्टर बनाए। छात्राओं और शिक्षिकाओं ने नारी गरिमा को बनाए रखने की शपथ ली। उन्होंने कहा कि समाज की सोच बदलेगी, तभी नारी अपराजिता होगी।
बुधवार को विद्यालय में हुए कार्यक्रम को संबोधित करते हुए प्रधानाचार्य अश्वनी शर्मा ने कहा कि महिलाओं का स्थान हमेशा से ही ऊंचा रहा है। प्राचीनकाल से ही महिलाएं पुरुषों के कंधे से कंधा मिलाकर चल रही हैं। इतिहास में कई ऐसी घटनाएं दर्ज हैं, कि महिलाओं ने अपने देश और अपने सम्मान की रक्षा के लिए युद्ध तक लड़ा। रानी लक्ष्मीबाई ऐसा ही एक उदाहरण हैं। पुराणों में भी वर्णन है कि राजाओं के साथ उनकी रानियां भी युद्ध लड़ने के लिए जाती थीं। आज के युग में महिलाएं किसी भी क्षेत्र में पुरुषों से पीछे नही हैं। आईटी सेक्टर, बैंक, शिक्षा के अलावा महिलाएं सेना और वायुसेना तक में अपना लोहा मनवा रहीं हैं। नारी हमेशा से ही अपराजिता रही है। उन्होंने छात्राओं से नारी की गारिमा को बनाए रखते हुए बिना डरे अपने सपने को पूरा करने के लिए प्रयास करने को कहा। कार्यक्रम के दौरान छात्राओं के बीच नारी सशक्तिकरण पर पोस्टर प्रतियोगिता का कराई। प्रतियोगिता में विद्यालय की 200 से अधिक छात्राओं ने भाग लिया। अंत में प्रधानाचार्य ने छात्राओं और शिक्षिकाओं को नारी की गरिमा बनाए रखने एवं अपने परिवार और आसपास के लोगों को नारी का सम्मान करने के लिए जागरूक करने की शपथ दिलाई। कार्यक्रम के आयोजन में दीपक कुमार, रजनीश, नरेंद्र कौर, शालिनी वत्स, शीतल आदि का योगदान रहा।
महिलाएं कहीं भी पुरुषों से पीछे नहीं
शिक्षिका शीतल शैल का कहना है कि नारी शक्ति को कभी भी कम करके नहीं आंकना चाहिए। आज भी बेटियों पर तरह-तरह की वंदिशे लगाई जाती हैं, जबकि बेटों को छूट दे दी जाती है यह गलत है। हम 21वीं सदी में जी रहे हैं, अब महिलाए कहीं भी पुरुषों से पीछे नही हैं।
नरेंद्र कौर का कहना है कि महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए उनके परिवार को पूरी आजादी दी जाए तभी सही मायनों में नारी सशक्तिकरण का लक्ष्य पूरा होगा। शालिनी वत्स का कहना है कि महिलाएं आज तरक्की की सीढ़ियां चढ़ रही हैं। वह हर क्षेत्र में पुरुषों के कंधे से कंधा मिलाकर चल रही हैं। उन्होंने समाज में अपनी अलग पहचान बनाई है। महिलाओं का भी कर्तव्य है कि वह नारी गरिमा को बनाए रखते हुए अपने पेशे और परिवार में समन्वय बनाए रखें। पल्लवी राजपूत का कहना है कि भारत में महिलाओं को प्राचीनकाल से ही देवी का दर्जा दिया गया है। पूजा भी पत्नी के बिना अधूरी मानी जाती है, लेकिन चिंता का विषय है कि आज भी कुछ स्थानों पर महिलाओं की स्थिति बेहद खराब है। समाज को महिलाओं के प्रति अपनी नकारात्मक सोच को बदलना होगा तभी महिला अपराजिता बनेगी। पारुल कौशिक का कहना है कि अमर उजाला ने अपराजिता अभियान चलाकर महिलाओं को उनके अधिकारों के लिए जागरूक करने का काम किया है।
छात्राओं ने की अपराजिता अभियान की सराहना
छात्रा अलीशा इदरीशी ने अपराजिता अभियान की सराहना करते हुए कहा कि नारी गरिमा पर हुए इस कार्यक्रम से एक नया जोश पैदा हुआ है। अनामिका ने कहा कि अमर उजाला के अपराजिता अभियान ने नारी सम्मान को बढ़ावा दिया है। इस कार्यक्रम से लोगों में महिलाओं के प्रति सोच में भी बदलाव आएगा। सिमरन यादव ने कहा महिलाओं के प्रति अपराधों की खबरें पढ़ सुनकर बहुत दुख होता है। महिलाएं सभी क्षेत्रों में बेहतर काम कर रही हैं, लेकिन कहीं कहीं बेटों और बेटियों में फर्क किया जाता है। लिपिका ने कहा कि बेटियों को स्वतंत्र कर उन्हें अपनी मर्जी से अपना करियर चुनने की आजादी दी जाए तो महिलाएं पुरुषों से भी बेहतर साबित हो सकती हैं। अपराजिता कार्यक्रम से उनमें कुछ नया करने का जज्बा पैदा हुआ है।