वेव ग्रुप ने मिलों के संचालन को दी हरी झंडी
बिजनौर। किसानों के प्रदर्शन और सरकार की सख्ती से वेव ग्रुप बैकफुट पर आ गया है। वेव ग्रुप आखिरकार बिजनौर और चांदपुर चीनी मिलों की मरम्मत के लिए हामी भर दी है। शासन से वार्ता के बाद ग्रुप के अधिकारियों ने चीनी मिल अधिकारियों को मरम्मत कार्य का आंकलन करने के लिए कहा है। इसी हफ्ते में चीनी मिलों में मरम्मत कार्य शुरू हो सकता है। ग्रुप के इस फैसले से 25 हजार किसानों को राहत मिली है।
2009 में बसपा शासनकाल में वेव ग्रुप को बेची गई चीनी मिलों के मामले में सीबीआई जांच की जा रही है। वेव ग्रुप की मिलों को बैंकों ने ऋण देने से भी इंकार कर दिया था। इस पर ग्रुप के अधिकारियों ने चीनी मिल चलाने से हाथ खडे़ कर दिए थे। मिल की मरम्मत न होने के विरोध में किसान सड़कों पर उतर आए थे। तीन अगस्त को हजारों किसानों ने कलक्ट्रेट में धरना-प्रदर्शन किया था और साथ ही ग्रुप की शराब की दुकानों की तालाबंदी कर दी थी। सैकड़ों किसानों ने कोतवाली शहर में जाकर गिरफ्तारी दी थी। किसानों ने वेव ग्रुप के वेस्ट यूपी में स्थित सभी व्यापारिक प्रतिष्ठानों पर भी कब्जा करने का भी एलान किया था। शासन और किसानों के दबाव से वेव ग्रुप बैकफुट पर आ गया है। ग्रुप के अधिकारियों ने मिल की मरम्मत कराने के लिए आंकलन करने के निर्देश दे हैं। वेव इंडस्ट्रीज के जीएम अशोक सिंह ने प्रेस को जारी अपने बयान में कहा है कि सरकार के शीर्ष स्तर के साथ वार्ता हो गई है। मैनेजमेंट ने उन्हें मिलों की मरम्मत के लिए आवश्यक कार्यों का आंकलन शुरू करने के निर्देश दे दिए हैं।
मिलों से जुडे़ हैं 25 हजार से ज्यादा किसान
बिजनौर शुगर मिल से 9600 किसान जुड़े हैं। इन किसानों का आठ हजार 22 हेक्टेअर जमीन में खड़ा गन्ना मिल में पेराई के लिए दिया जाता है। इसके अलावा चांदपुर शुगर मिल में 16 हजार किसान गन्ना देते हैं, इस मिल में 14 हजार 773 हेक्टेअर जमीन में खड़े गन्ने की पेराई होती है। भाकियू जिलाध्यक्ष दिगंबर सिंह के अनुसार सभी मिलों को हर हाल में चलवाया जाएगा। केंद्र सरकार ने मिलों की अंडर टेकिंग के लिए 1978 में बने कानून को खत्म कर दिया है। यानि अगर कोई उद्योगपति अपनी चीनी मिल नहीं चलाता है तो सरकार उसका अधिग्रहण नहीं कर सकेगी। इसके विरोध में 23 सितंबर को किसान क्रांति यात्रा हरिद्वार से शुरू की जाएगी जो दिल्ली पहुंचेगी।